हाईराइज सोसायटियों में घर पर जन्म लेने वाले बच्चों की बढ़ती संख्या
खास खबर: हाईराइज सोसायटियों के फ्लैटों में रोजाना जन्म ले रहे दो बच्चे, दाई करा रहीं डिलीवरी, ऐसे हुआ खुलासा
Amar Ujala
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कविनगर, सिटी और विजयनगर क्षेत्रों की हाईराइज सोसायटियों में रोजाना दो बच्चों का जन्म फ्लैट में हो रहा है। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 732 जन्म प्रमाणपत्रों के लिए आवेदन किए गए, जिनमें से 630 घर पर हुए प्रसव के मामले हैं।
- 01कविनगर, सिटी और विजयनगर की हाईराइज सोसायटियों में रोजाना दो बच्चों का जन्म हो रहा है।
- 02अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 732 जन्म प्रमाणपत्रों के लिए आवेदन आए।
- 03फरवरी-मार्च में जन्म प्रमाणपत्रों के लिए आवेदन की संख्या में 25-30% की वृद्धि हुई।
- 04गर्भवती महिलाओं की देखभाल की जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ताओं की होती है।
- 05स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि सभी प्रसव अस्पतालों में हो रहे हैं, जबकि नगर निगम के आंकड़े अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।
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कविनगर, सिटी और विजयनगर क्षेत्रों की हाईराइज सोसायटियों में घर पर बच्चों के जन्म की संख्या में वृद्धि हो रही है। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच इन क्षेत्रों से 732 जन्म प्रमाणपत्रों के लिए आवेदन आए, जिनमें से 630 घर पर प्रसव के मामले हैं। विशेष रूप से, फरवरी-मार्च के दौरान जन्म प्रमाणपत्रों के लिए आवेदन की संख्या में 25-30% की वृद्धि देखी गई। अधिकारियों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं की देखभाल और प्रसव की जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ताओं की होती है, लेकिन नगर निगम के आंकड़े इस दावे को चुनौती देते हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी ने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में घर पर प्रसव हुए हैं, तो यह जांच का विषय है कि स्वास्थ्य कर्मियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हो सकी।
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यह स्थिति स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं और प्रसव की देखभाल की गुणवत्ता पर सवाल उठाती है।
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