भारत में फैक्ट्रियों में सुरक्षा की कमी से हर दिन तीन मजदूरों की होती है मौत
देश में हादसों की बलि चढ़ते हैं रोज तीन मजदूर, 10% फैक्ट्रियों में ही सेफ्टी पॉलिसी, 2% में ही सेफ्टी अफसर
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भारत में फैक्ट्रियों में सुरक्षा की कमी के कारण हर दिन औसतन तीन मजदूरों की मौत होती है। हाल के हादसों में छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु में कई मजदूरों की जान गई, जबकि केवल 10% फैक्ट्रियों में ही सुरक्षा नीतियां लागू हैं। यह स्थिति असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे मजदूरों के लिए और भी चिंताजनक है।
- 01हर दिन औसतन तीन मजदूरों की मौत होती है।
- 02फैक्ट्रियों में सुरक्षा नीतियों की अनुपस्थिति गंभीर है।
- 0390% मजदूर असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं।
- 042023 में 1,090 मजदूरों की मौत हुई।
- 05सिर्फ 6,592 फैक्ट्रियों में ही सुरक्षा अधिकारी हैं।
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भारत में फैक्ट्रियों में सुरक्षा की स्थिति गंभीर है। हाल ही में छत्तीसगढ़ के सक्ती में वेदांता पावर प्लांट में एक ब्लास्ट में 24 मजदूरों की मौत हुई, जबकि तमिलनाडु के विरुधनगर में एक पटाखा फैक्ट्री में 25 मजदूरों की जान गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हर दिन औसतन 3 मजदूरों की मौत होती है, और 2023 में कुल 1,090 मजदूरों की मौत हुई। श्रम मंत्रालय के अनुसार, 3.34 लाख रजिस्टर्ड फैक्ट्रियों में से केवल 34,450 में ही सुरक्षा नीतियां लागू हैं। इसके अलावा, सिर्फ 6,592 फैक्ट्रियों में सुरक्षा अधिकारी हैं, जबकि 90% मजदूर असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे हैं, जिनका कोई रिकॉर्ड नहीं है। यह स्थिति मजदूरों के लिए अत्यंत खतरनाक है और उनके जीवन को जोखिम में डालती है।
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फैक्ट्रियों में सुरक्षा की कमी से मजदूरों के जीवन को खतरा है, जिससे उनके परिवारों पर भी बुरा असर पड़ता है।
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