आईआईटी धनबाद की रिपोर्ट: गंगा जी के 99 जलधाराएं हर दिन हो रहीं विलुप्त
गंगा जी पर IIT की ये रिपोर्ट बहुत डराने वाली है... हर दिन 99 जलधाराएं हो रहीं विलुप्त!

Image: Zee News
आईआईटी धनबाद की एक नई रिसर्च में बताया गया है कि पिछले 50 वर्षों में गंगा नदी की 18 लाख जलधाराएं गायब हो गई हैं, जो हर दिन 99 जलधाराओं के विलुप्त होने का संकेत है। यह स्थिति जलस्तर, कृषि और प्राकृतिक आपदाओं पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
- 01पिछले 50 वर्षों में गंगा की 18 लाख जलधाराएं समाप्त हो चुकी हैं, जो पृथ्वी के 25 चक्कर लगाने के बराबर है।
- 02ड्रेनेज डेंसिटी 2 किलोमीटर से घटकर 1 किलोमीटर से कम हो गई है, जिससे जल निकासी की प्राकृतिक व्यवस्था कमजोर हो रही है।
- 03नदियों के सिकुड़ने का मुख्य कारण कृषि विस्तार, शहरीकरण और अवैध रेत खनन है।
- 04जलधाराओं के विलुप्त होने से जलस्तर में गिरावट आ रही है, जिससे हैंडपंप और बोरवेल सूख रहे हैं।
- 05रिसर्च में सुझाव दिया गया है कि नदियों और जलधाराओं को बचाने के लिए उनकी आसपास की जमीन को सुरक्षित करना आवश्यक है।
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आईआईटी धनबाद की एक नई रिसर्च में गंगा नदी के जलधाराओं के विलुप्त होने की गंभीर स्थिति का खुलासा हुआ है। पिछले 50 वर्षों में गंगा की लगभग 18 लाख जलधाराएं गायब हो गई हैं, जो हर दिन 99 जलधाराओं के खत्म होने का संकेत देती हैं। यह स्थिति न केवल जलस्तर पर प्रभाव डाल रही है, बल्कि कृषि और प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को भी बढ़ा रही है। रिसर्च में पाया गया कि ड्रेनेज डेंसिटी, जो किसी क्षेत्र में पानी के बहाव के प्राकृतिक रास्तों की संख्या को दर्शाती है, 2 किलोमीटर से घटकर 1 किलोमीटर से कम हो गई है। इसके पीछे कृषि विस्तार, शहरीकरण और अवैध रेत खनन जैसे कारण हैं। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि ये जलधाराएं नहीं बचाई गईं, तो आने वाले समय में सूखा, बाढ़ और अन्य आपदाओं का खतरा बढ़ जाएगा। नदियों की सुरक्षा के लिए सुझाव दिया गया है कि उनके आस-पास की भूमि को सुरक्षित करना और सूख चुकी जलधाराओं को पुनर्जीवित करना आवश्यक है।
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जलधाराओं के विलुप्त होने से जलस्तर में गिरावट आ रही है, जिससे हैंडपंप और बोरवेल सूख रहे हैं।
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