उदयपुर की कोफ्तगिरी कला को मिला वैश्विक मान्यता, पीएम मोदी ने भेंट किया खास खंजर
पीएम मोदी के हाथों दुनिया तक पहुंची उदयपुर की सदियों पुरानी कला; जानिए क्यों खास है यह खंजर?

Image: News 18 Hindi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई दौरे के दौरान उदयपुर की पारंपरिक कोफ्तगिरी कला से बना एक खंजर राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद को भेंट किया। यह खंजर मेवाड़ की सदियों पुरानी कला और भारतीय कारीगरों की मेहनत का प्रतीक है, जिससे स्थानीय कला को वैश्विक पहचान मिली है।
- 01उदयपुर के सिकलीगर आर्ट्स की कार्यशाला में तैयार किया गया खंजर पारंपरिक कोफ्तगिरी कला का एक उदाहरण है।
- 02कोफ्तगिरी कला में लोहे या अन्य धातु पर सोने और चांदी की महीन जड़ाई की जाती है।
- 03यह खंजर पीएम मोदी द्वारा यूएई राष्ट्रपति को भेंट किया गया, जो 'वोकल फॉर लोकल' और 'मेक इन इंडिया' अभियानों को प्रोत्साहित करता है।
- 04इस कला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलने से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी।
- 05कोफ्तगिरी कला मेवाड़ की सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो अब वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त कर चुकी है।
Advertisement
In-Article Ad
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने यूएई दौरे के दौरान उदयपुर की पारंपरिक कोफ्तगिरी कला से बना एक विशेष खंजर राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद को भेंट किया। यह खंजर केवल एक उपहार नहीं है, बल्कि मेवाड़ की सदियों पुरानी कला और भारतीय कारीगरों की मेहनत का प्रतीक है। स्थानीय कलाकारों ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है, जो पारंपरिक कोफ्तगिरी कला को जीवित रखने के प्रयासों को प्रोत्साहन देगा। इस कला में लोहे या अन्य धातु पर सोने और चांदी की महीन जड़ाई की जाती है, जो पूरी तरह से हाथ से की जाती है। खंजर की डिज़ाइन में पारंपरिक मेवाड़ी तत्व और शाही शैली का ध्यान रखा गया है। यह खंजर अब न केवल उदयपुर बल्कि पूरे राजस्थान और भारत के लिए गर्व का विषय बन गया है।
Advertisement
In-Article Ad
इस खंजर की अंतरराष्ट्रीय पहचान से उदयपुर की कोफ्तगिरी कला को नया बाजार और पहचान मिलेगी।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आप भारत की पारंपरिक कला को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने के प्रयासों का समर्थन करते हैं?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।




