लेखक: छांग बॉम किमकई साल पहले जब मैं पहली बार भारत आया, तब इसके विशाल आकार ने ही नहीं, इसकी विविधता, यहां के लोगों और उद्योगों ने भी मुझे पर गहरी छाप छोड़ी। गुजरात की व्यापारिक ऊर्जा से लेकर तमिलनाडु की मैन्युफैक्चरिंग ताकत तक, भारत एक बाजार नहीं, कई विकास इंजन का देश लगा। वह छाप समय के साथ और गहरी हुई है। कोरिया और भारत का रिश्ता व्यापार से बहुत आगे बढ़ चुका है। आज यह साझेदारी प्रॉडक्शन, रिसर्च और इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम तक फैल चुकी है।सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स, हुंडई मोटर और एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कोरियाई कंपनियों ने पूरे भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। ये कंपनियां स्थानीय स्तर पर ही उत्पादन कर रही हैं, इन्होंने अपने सप्लायर नेटवर्क बनाए हैं और पूरी दुनिया में यहां से आयात हो रहा है। भारत में अभी 600 से ज्यादा कोरियाई कंपनियां सक्रिय हैं और इनमें से कई लोकल मैन्युफैक्चरिंग व सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बन चुकी हैं।मेक इन इंडिया से मेक विद इंडियायह कहानी एकतरफा नहीं है। भारतीय कंपनियां अब वैश्विक खिलाड़ी के तौर पर उभर रही हैं और कोरिया का उद्योग उनके साथ साझेदार के रूप में जुड़ रहा है। टाटा मोटर्स और कोचीन शिपयार्ड जैसी दिग्गज कंपनियों के साथ सहयोग दिखाता है कि यह रिश्ता अब ज्यादा संतुलित व भविष्य की सोच वाला है। संबंध अब केवल एक-दूसरे के बाजार में प्रवेश तक सीमित नहीं रहे, यह साथ मिलकर निर्माण करने वाले हैं।यह बदलाव मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन में खास तौर पर दिखाई देता है। भारत के 'मेक इन इंडिया' इनिशिएटिव ने औद्योगिक विकास के लिए मजबूत आधार दिया है। इसे साथ मिल रहा है स्थिर नीतियों, स्किल्ड ह्यूमन रिसोर्स और बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर का। अब अगला चरण सामने आ रहा है, जिसे 'Make with India ' कहा जा सकता है। यह दिखाता है कि अब बदलाव प्रॉडक्शन से आगे साथ मिलकर निर्माण और वैल्यू क्रिएशन की ओर हो रहा है।इस बदलाव के केंद्र में होंगे रिसर्च एंड डिवेलपमेंट। कोरिया के बाहर सैमसंग का सबसे बड़ा रिसर्च एंड डिवेलपमेंट सेंटर बंगलुरू में है, जहां कंपनी भारत की इंजीनियरिंग प्रतिभा के साथ मिलकर काम कर रही है। इंडस्ट्री और यूनिवर्सिटी के बीच सहयोग भविष्य के इनोवेटर्स तैयार कर रहा है। सेमीकंडक्टर, मोबिलिटी, क्लीन एनर्जी और डिजिटल टेक्नॉलजी में नए मौके बन रहे हैं। इस संदर्भ में 'innovate with India' अब सिर्फ चाहत नहीं, हकीकत का रूप ले रहा है।कोरिया को भा रहीं भारतीय परंपराएंइस साझेदारी का मानवीय और सांस्कृतिक पक्ष भी उतना ही अहम है। कोरिया में करी, बटर चिकन और नान जैसे भारतीय व्यंजन तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। चाय वहां की पसंद बनती जा रही है। योग और मेडिटेशन कोरिया के वेलनेस कल्चर का हिस्सा बन चुके हैं। यह भारत की परंपराओं के प्रति बढ़ती रुचि को दिखाता है। सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी दोनों तरफ से हो रहा है। हाल में नेटफ्लिक्स पर एक फिल्म रिलीज हुई - मेड इन कोरिया। इसमें दिखाया गया कि तमिलनाडु की एक युवती अपने सपनों का पीछा करते हुए सोल (Seoul) पहुंचती है। यह कहानी कई युवा भारतीयों से जुड़ती है, जो कोरिया को अवसरों की भूमि के रूप में देख रहे हैं।आज कई भारतीय युवा कोरिया में पढ़ाई और काम कर रहे हैं व वहां के उद्योगों और समाज से जुड़ रहे हैं। उनकी कहानियां और कोरियाई परिवारों द्वारा भारतीय संस्कृति को अपनाना दिखाता है कि यह साझेदारी अब ज्यादा व्यक्तिगत और मजबूत बन रही है।बदलती दुनिया में रिश्ता ज्यादा अहमदोनों देशों को करीब लाने में लीडरशिप ने भी बड़ी भूमिका निभाई है। पीएम नरेंद्र मोदी ने मैन्युफैक्चरिंग, इनोवेशन और वैश्विक भागीदारी पर जोर दिया है। इससे भारत के आर्थिक बदलाव को स्पष्ट दिशा मिली। उनके प्रयासों से दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ा है। कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग की भारत यात्रा द्विपक्षीय रिश्तों में अगला अहम पड़ाव है।बातचीत और सहयोग के मंच अब पहले से ज्यादा अहम हो गए हैं। इंडिया-कोरिया बिजनेस फोरम सहयोग के नए दौर की शुरुआत बन सकता है। इसका आयोजन फेडरेशन ऑफ कोरियन इंडस्ट्रीज (FKI) और फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) मिलकर करते हैं।वैश्विक अर्थव्यवस्था जैसे-जैसे जटिल होती जा रही है, सप्लाई चेन बदल रही हैं और प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, वैसे-वैसे कोरिया-भारत आर्थिक सहयोग और अहम होता जा रहा है। कोरिया की औद्योगिक क्षमता को भारत के बड़े बाजार, प्रतिभा और क्षेत्रीय विविधता के साथ जोड़कर दोनों देश मजबूत और भविष्य केंद्रित साझेदारी बना सकते हैं। दोनों देशों के संबंधों का अगला अध्याय केवल व्यापार नहीं, सहयोग की गहराई से तय होगा। 'Make with India' साझा विकास की रूपरेखा के रूप में इस दिशा को बखूबी दिखाता है। अब वक्त है कि दोनों देश साथ मिलकर आगे बढ़ें।(लेखक दी फेडरेशन ऑफ कोरियन इंडस्ट्रीज के वाइस चेयरमैन और CEO हैं)