हिमाचल प्रदेश: बच्चों के लिए वैक्सीनेशन में दो वैक्सीन के सैंपल फेल
हिमाचल: सीडीएल कसौली में बच्चों को कई बीमारियों से बचाने वाली दो वैक्सीन के सैंपल फेल, मानकों पर सही नहीं पाई
Amar Ujala
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केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला, कसौली में जांच के दौरान बच्चों को विभिन्न बीमारियों से बचाने वाली दो वैक्सीन के सैंपल मानकों पर सही नहीं पाए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय को इस मामले की जानकारी दी गई है और कंपनियों को नोटिस जारी किया जाएगा।
- 01कसौली में बच्चों के लिए वैक्सीनेशन की दो वैक्सीन के सैंपल फेल हुए।
- 02ये वैक्सीन गंभीर बीमारियों जैसे निमोनिया और डिप्थेरिया से बचाने के लिए लगाई जाती हैं।
- 03स्वास्थ्य मंत्रालय को सैंपल फेल होने की जानकारी भेजी गई है।
- 04कंपनियों को नोटिस जारी किया जाएगा, लेकिन कंपनियों की पहचान अभी नहीं हुई है।
- 05स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने वैक्सीन की गुणवत्ता में कमी को चिंता का विषय बताया है।
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केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल), कसौली में बच्चों को विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए भेजी गई दो वैक्सीनेशन वैक्सीन के सैंपल मानकों पर सही नहीं पाए गए हैं। ये वैक्सीन निमोनिया, डिप्थेरिया (गलघोंटू), टिटनेस, काली खांसी, हेपेटाइटिस बी और हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी जैसी गंभीर बीमारियों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय को इस मामले की जानकारी भेजी गई है, और कंपनियों को नोटिस जारी किया जाएगा। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ये वैक्सीन किस राज्यों की कंपनियों की हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के टीकाकरण में इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन की गुणवत्ता में कमी होना गंभीर चिंता का विषय है। हाल ही में, अप्रैल में सीडीएल कसौली में जांच के लिए भेजे गए 141 दवाओं के सैंपल भी फेल पाए गए थे, जिनमें से 46 दवाएं हिमाचल प्रदेश में बनी थीं।
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बच्चों के टीकाकरण में वैक्सीन की गुणवत्ता में कमी से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
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