सरकार का नया मुद्रीकरण मॉडल: निजी कंपनियों का परिचालन, सरकारी संपत्ति का स्वामित्व
निजीकरण नहीं, मुद्रीकरण: सरकार बनाएगी और मालिक रहेगी, निजी कंपनियां सिर्फ चलाएंगी प्रोजेक्ट्स
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Context
भारत में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) एक महत्वपूर्ण मॉडल है। हाल के वर्षों में, सरकार ने बुनियादी ढांचे के मुद्रीकरण के लिए राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य सरकारी संपत्तियों का परिचालन निजी कंपनियों को सौंपना है।
What The Author Says
लेखक का तर्क है कि सरकार ने बुनियादी ढांचे के मुद्रीकरण के लिए एक नया मॉडल तैयार किया है, जिसमें निजी कंपनियां सिर्फ परिचालन करेंगी। यह मॉडल पिछले पीपीपी प्रयासों की गलतियों से सीखकर बनाया गया है।
Key Arguments
📗 Facts
- एनएमपी 2.0 का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026-30 के लिए 16.72 लाख करोड़ रुपये है।
- पिछले एनएमपी 1.0 का लक्ष्य 5.95 लाख करोड़ रुपये था।
- 73 पीपीपी परियोजनाओं में से 43 को रद्द करना पड़ा।
📕 Opinions
- लेखक का मानना है कि नया मुद्रीकरण मॉडल बुनियादी ढांचे की आपूर्ति में निजी पूंजी की भागीदारी के लिए एक वैकल्पिक रास्ता है।
- लेखक यह भी मानते हैं कि सार्वजनिक परिसंपत्तियों को कमाई का जरिया बनाना अब सार्वजनिक-निजी भागीदारी का नया स्वरूप है।
Counterpoints
क्या निजी कंपनियों को संचालन का अधिकार देना उचित है?
कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सरकारी नियंत्रण को कमजोर कर सकता है और सार्वजनिक हितों को खतरे में डाल सकता है।
क्या एनएमपी 2.0 वास्तव में सफल होगा?
पिछले अनुभवों के आधार पर, कई लोग संदेह करते हैं कि यह नया मॉडल पहले की तरह समस्याओं का सामना नहीं करेगा।
क्या सामाजिक सेवाओं का ध्यान रखा जाएगा?
निजी कंपनियों की प्राथमिकता लाभ कमाना हो सकती है, जिससे जनसेवा प्रभावित हो सकती है।
Bias Assessment
लेखक सरकारी दृष्टिकोण को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन निजी क्षेत्र की चिंताओं को भी मानते हैं।
Why This Matters
भारत की बुनियादी ढांचे की रणनीति में यह बदलाव समय की आवश्यकता है, क्योंकि पिछले प्रयासों में कई समस्याएं आई थीं। एनएमपी 2.0 का लक्ष्य 16.72 लाख करोड़ रुपये है, जो पहले के लक्ष्य से लगभग 2.6 गुना अधिक है।
🤔 Think About
- •क्या यह नया मॉडल वास्तव में बुनियादी ढांचे में सुधार करेगा?
- •क्या निजी कंपनियों का परिचालन जनहित को प्रभावित करेगा?
- •क्या सरकार को पूरी तरह से निजी क्षेत्र पर निर्भर रहना चाहिए?
- •क्या पिछले अनुभवों से सीखा गया है, या वही गलतियाँ दोहराई जाएँगी?
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