जर्मनी में भारतीय छात्रों का शोषण: प्राइवेट यूनिवर्सिटीज की फीस और डिग्री की मान्यता
जर्मनी में नहीं होता है 'यूनिवर्सिटी' शब्द का यूज!
Aaj Tak
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जर्मनी में उच्च शिक्षा का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों को प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में उच्च ट्यूशन फीस का सामना करना पड़ रहा है। कई छात्र डिलीवरी सेवाओं में काम कर रहे हैं ताकि वे अपनी फीस चुका सकें, जबकि उनकी डिग्रियों की मान्यता भी संदिग्ध है।
- 01जर्मनी में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज की फीस भारतीय छात्रों के लिए भारी है।
- 02कई छात्र डिलीवरी जैसे काम कर रहे हैं ताकि फीस चुका सकें।
- 03प्राइवेट यूनिवर्सिटीज की डिग्रियों की राज्य स्तर पर मान्यता नहीं होती।
- 04जर्मनी में 'यूनिवर्सिटी' शब्द का उपयोग करने के लिए सरकारी मंजूरी आवश्यक है।
- 05महंगाई के कारण छात्रों को अतिरिक्त काम करने की आवश्यकता पड़ रही है।
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जर्मनी में उच्च शिक्षा का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों को प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में ट्यूशन फीस का सामना करना पड़ रहा है, जो कि बहुत अधिक है। जैम कामरथ, जो एक टेक वर्कर हैं, ने बताया कि कई छात्र अपनी फीस चुकाने के लिए उबर ईट्स और अन्य डिलीवरी सेवाओं में काम कर रहे हैं। ये छात्र सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, एआई, और डेटा एनालिटिक्स जैसे कोर्स करने के लिए जर्मनी आते हैं, लेकिन उन्हें अपनी पढ़ाई के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। प्राइवेट यूनिवर्सिटीज की डिग्रियों की मान्यता भी संदिग्ध है, क्योंकि कई मामलों में ये डिग्रियाँ यूरोपीय संघ के किसी देश द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं होती। जर्मनी में 'यूनिवर्सिटी' शब्द का उपयोग करने के लिए सरकारी मंजूरी आवश्यक है, जिसके कारण प्राइवेट संस्थान 'बिजनेस स्कूल' जैसे नामों का उपयोग करते हैं। महंगाई के कारण छात्रों को रहन-सहन और खाने की कीमतों में वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और भी कठिन हो गई है।
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भारतीय छात्रों को उच्च ट्यूशन फीस और महंगाई का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी पढ़ाई और जीवन स्तर प्रभावित हो रहा है।
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