सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा हिंसा मामले में गिरफ्तार आरोपितों को पेश करने का आदेश दिया
नोएडा हिंसा केस में SC सख्त, गिरफ्तार दो आरोपितों को पेश करने का आदेश
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सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में 13 अप्रैल को हुए श्रमिक विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार आदित्य आनंद और रूपेश राय को 18 मई को पेश करने का आदेश दिया है। आरोप है कि पुलिस ने आदित्य को हिरासत में प्रताड़ित किया।
- 01आदित्य आनंद के भाई केशव आनंद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
- 02आदित्य आनंद एक फैक्ट्री में इंजीनियर है और बच्चों के लिए लाइब्रेरी चलाता है।
- 03उत्तर प्रदेश पुलिस ने छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी और पत्रकार सत्यम वर्मा के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम लागू किया है।
- 04पुलिस का दावा है कि सत्यम वर्मा के बैंक खाते में विदेश से एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा की गई थी।
- 05आकृति चौधरी और सत्यम वर्मा को श्रमिक आंदोलन के दौरान हिंसक प्रदर्शनों में शामिल होने का आरोप है।
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सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में 13 अप्रैल को हुए औद्योगिक श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार आदित्य आनंद और रूपेश राय को 18 मई को पेश करने का आदेश दिया है। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने यह निर्देश दिया। आदित्य के भाई केशव आनंद ने याचिका में आरोप लगाया है कि पुलिस ने आदित्य को हिरासत में प्रताड़ित किया। वरिष्ठ वकील कोलिन गोंसाल्विस ने अदालत में दलील दी कि आदित्य एक फैक्ट्री में काम करता है और बच्चों के लिए लाइब्रेरी चलाता है। उन्होंने स्वतंत्र जांच की मांग की और कहा कि आदित्य के भाषण श्रमिकों के अधिकारों पर केंद्रित थे। उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने हिरासत में प्रताड़ना के आरोपों का खंडन किया। इससे पहले, पुलिस ने छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी और पत्रकार सत्यम वर्मा के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत कार्रवाई की थी। पुलिस का आरोप है कि सत्यम वर्मा के बैंक खाते में विदेश से एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा की गई थी, जो कि श्रमिक आंदोलन के दौरान हिंसक प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए उपयोग की गई।
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इस मामले के परिणाम से स्थानीय श्रमिकों के अधिकारों और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ सकते हैं।
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