हिमाचल हाईकोर्ट ने 20 साल बाद नौतोड़ भूमि आवंटन की चुनौती खारिज की
Himachal: हाईकोर्ट ने कहा- 20 साल बाद नौतोड़ जमीन आवंटन को चुनौती तर्कसंगत नहीं, अपील खारिज
Amar Ujala
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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने 20 साल बाद नौतोड़ भूमि आवंटन को चुनौती देने वाली अपील को खारिज कर दिया। अपीलकर्ता बिशंबर नाथ ने 1987 में भूमि आवंटन के लिए आवेदन किया था, लेकिन 1999 में उन्हें कुछ भूमि नहीं मिली। अदालत ने देरी का कोई उचित कारण नहीं पाया।
- 01हिमाचल हाईकोर्ट ने 20 साल बाद भूमि आवंटन की चुनौती खारिज की।
- 02अपीलकर्ता ने 1987 में भूमि आवंटन के लिए आवेदन किया था।
- 031999 में कुछ भूमि का आवंटन हुआ, लेकिन 80 नंबर की भूमि नहीं मिली।
- 04अदालत ने 2016 में जानकारी मिलने के बावजूद देरी पर सवाल उठाया।
- 05राज्य सरकार ने प्री-स्कूलों के लिए नया कानून लागू किया।
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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने नौतोड़ भूमि आवंटन को चुनौती देने वाली बिशंबर नाथ की अपील को खारिज कर दिया। नाथ ने 1987 में खसरा नंबर 70, 80 और 86/2 के लिए आवेदन किया था, लेकिन 1999 में उन्हें केवल दो नंबर आवंटित किए गए थे। 2004 में खसरा नंबर 80 अन्य प्रतिवादियों को आवंटित कर दिया गया। अदालत ने यह भी कहा कि 2016 में जानकारी मिलने के बावजूद 2024 तक याचिका दायर करने में देरी का कोई उचित कारण नहीं बताया गया। इसके अलावा, हाईकोर्ट ने राज्य में शराब की बोतलों पर ट्रैक एंड ट्रेस तकनीक वाले होलोग्राम के टेंडर में हस्तक्षेप करने से भी इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि टेंडर की शर्तें विभाग का विशेषाधिकार हैं। इसके साथ ही, हिमाचल प्रदेश अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन सेंटर (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2017 को आधिकारिक रूप से प्रकाशित किया गया है।
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इस निर्णय से भूमि आवंटन में पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में ऐसे मामलों में जल्दी निर्णय लेने की प्रक्रिया को प्रोत्साहन मिलेगा।
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