बिहार में साइबर अपराध के मामलों में बढ़ोतरी, 99.8% केस लंबित
साइबर थाने में FIR कराकर भूल जाइए! बिहार के 99.8 फीसदी केस पेंडिंग, NCRB से खुली पोल
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
बिहार में साइबर अपराध के मामलों में डेढ़ गुना वृद्धि हुई है, लेकिन 99.8% मामले लंबित हैं। पुलिस ने केवल 12 मामलों का निपटारा किया है, जिसमें से 8 अपराधियों को सजा मिली। इस स्थिति से पीड़ितों को न्याय मिलने में सालों लग सकते हैं।
- 01बिहार में साइबर अपराध के मामले 6380 तक पहुंचे हैं।
- 02पुलिस ने केवल 12 मामलों का निपटारा किया है।
- 0387% मामलों की जांच अधूरी है।
- 04साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी की संख्या 1333 है।
- 05अदालती ट्रायल के लिए 5782 मामले लंबित हैं।
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बिहार में साइबर अपराध के मामलों में डेढ़ गुना वृद्धि हुई है, जो 2023 में 4450 से बढ़कर 2024 में 6380 हो गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 99.8% मामलों का निपटारा नहीं हो पाया है, जिससे पीड़ितों को न्याय मिलने में सालों लग सकते हैं। पुलिस ने केवल 12 मामलों का निबटारा किया है, जिनमें से 8 अपराधियों को सजा मिली। रिपोर्ट के अनुसार, 87% मामलों की जांच अधूरी है और पुलिस ने केवल 917 मामलों में चार्जशीट दाखिल की है। इस स्थिति के कारण साइबर ठगों के खिलाफ कानून का भय खत्म हो रहा है। अदालती ट्रायल के लिए 5782 मामले लंबित हैं, और राष्ट्रीय स्तर पर भी साइबर केसों के निपटारे की दर केवल 9% है। जानकारों का मानना है कि तकनीकी विशेषज्ञों की कमी और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण पुलिस चार्जशीट दाखिल करने में विफल हो रही है।
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इस स्थिति से पीड़ितों को न्याय मिलने में सालों लग सकते हैं, जिससे समाज में साइबर अपराध के प्रति जागरूकता और विश्वास में कमी आ सकती है।
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