IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटी की प्रेरणादायक सफलता की कहानी
सफलता की असली कहानी- कभी JEE एग्जाम में हो गए थे फेल, आज हैं IIT मद्रास के डायरेक्टर

Image: Ndtv
IIT मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटी ने एक बार JEE परीक्षा में असफलता का सामना किया था। उन्होंने केवल 10 अंक प्राप्त किए थे, लेकिन निराश नहीं हुए और IIT मद्रास से एमएस और पीएचडी की डिग्री हासिल की। उनकी कहानी छात्रों के लिए प्रेरणा है।
- 01प्रोफेसर वी. कामकोटी ने 1985 में JEE परीक्षा में केवल 10 अंक प्राप्त किए थे।
- 02उन्होंने IIT मद्रास से एमएस और पीएचडी की डिग्री प्राप्त की।
- 03वे 2022 में IIT मद्रास के निदेशक नियुक्त हुए।
- 04उनका कहना है कि असफलता को जीवन का अंतिम निर्णय नहीं मानना चाहिए।
- 05उनकी कहानी यह दर्शाती है कि मेहनत और धैर्य से किसी भी ऊंचाई को हासिल किया जा सकता है।
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प्रोफेसर वी. कामकोटी, जो वर्तमान में IIT मद्रास के निदेशक हैं, ने एक बार JEE परीक्षा में असफलता का सामना किया था। 1985 में, उन्होंने केमिस्ट्री में केवल 10 अंक प्राप्त किए, जिसके कारण उन्हें IIT में बीटेक प्रवेश नहीं मिला। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और IIT मद्रास से एमएस और पीएचडी की डिग्री हासिल की। उनकी मेहनत और समर्पण ने उन्हें 2022 में IIT मद्रास के निदेशक बनने का अवसर दिया। प्रोफेसर कामकोटी का मानना है कि छात्रों को किसी एक परीक्षा के परिणाम को अपनी पूरी जिंदगी नहीं मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर छात्र की प्रतिभा अलग होती है और असफलता भविष्य का फैसला नहीं करती। उनकी कहानी यह साबित करती है कि मेहनत, धैर्य और सीखने की इच्छा से कोई भी व्यक्ति अपने सपनों को साकार कर सकता है।
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प्रोफेसर कामकोटी की कहानी छात्रों को प्रेरित करती है कि असफलता के बाद भी सफलता संभव है।
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