बीमा क्षेत्र में कमीशन वृद्धि पर नियामक हस्तक्षेप की आवश्यकता: IRDAI चेयरमैन
बीमा क्षेत्र में ज्यादा कमीशन चिंताजनक, दखल देने की जरूरत: सेठ
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भारत के बीमा नियामक व विकास प्राधिकरण (IRDAI) के चेयरमैन अजय सेठ ने बीमा उद्योग में कमीशन की तेज वृद्धि पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र महंगे मध्यस्थों पर निर्भर है, जिससे पॉलिसीधारकों को नुकसान हो रहा है और इसकी लागत संरचना कमजोर हो रही है।
- 01अजय सेठ ने बीमा उद्योग में कमीशन वृद्धि पर हस्तक्षेप की आवश्यकता बताई।
- 02कमीशन की वृद्धि उच्च लागत की समस्या को दर्शाती है।
- 03महंगे मध्यस्थों पर निर्भरता से पॉलिसीधारकों को नुकसान हो रहा है।
- 04उच्च अग्रिम अधिग्रहण लागत से पॉलिसीधारकों का मूल्य कम हो रहा है।
- 05नियामक हस्तक्षेप की आवश्यकता अन्य क्षेत्रों में भी महसूस की जा रही है।
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भारत के बीमा नियामक व विकास प्राधिकरण (IRDAI) के चेयरमैन अजय सेठ ने हाल ही में बीमा उद्योग में कमीशन की वृद्धि को चिंताजनक बताया है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में कमीशन में हुई तीव्र वृद्धि यह दर्शाती है कि यह संरचनात्मक रूप से उच्च लागत वाला बन गया है। सेठ ने बताया कि बीमा उद्योग अभी भी महंगे मध्यस्थों पर निर्भर है, जबकि इसे लागत-कुशल डिजिटल परिवर्तन की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक उत्पादों में उच्च अग्रिम अधिग्रहण लागत पॉलिसीधारकों के लिए हानिकारक है, क्योंकि इससे प्रारंभिक वर्षों में परिसंपत्ति निर्माण कम होता है और समय से पहले बाहर निकलने पर न्यूनतम सरेंडर वैल्यू मिलती है। इस कारण से क्षेत्र की विश्वसनीयता और निरंतरता पर भी असर पड़ता है। सेठ ने अन्य क्षेत्रों में भी नियामक हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया।
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बीमा उद्योग में कमीशन वृद्धि से पॉलिसीधारकों को अधिक लागत का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनकी वित्तीय सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
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