महबूब खान: भारतीय सिनेमा के महान निर्देशक की प्रेरणादायक कहानी
रेलवे प्लेटफॉर्म पर काटी रातें, स्क्रिप्ट सुनकर मजाक उड़ाते थे मेकर्स, 1 जिद में बनाई कालजयी फिल्म

Image: News 18 Hindi
महबूब खान, भारतीय सिनेमा के एक महान निर्देशक, ने अपने संघर्षपूर्ण जीवन से 'मदर इंडिया' जैसी कालजयी फिल्म बनाई। उनका सफर मुंबई के रेलवे प्लेटफॉर्म से शुरू हुआ और उन्होंने कई सामाजिक मुद्दों को अपनी फिल्मों में उठाया।
- 01महबूब खान का जन्म गुजरात के एक गांव में हुआ और उन्होंने मुंबई में 'महबूब स्टूडियो' स्थापित किया।
- 02उनकी पहली फिल्म 'अल हिलाल' 1935 में रिलीज हुई, जिसने दर्शकों का दिल जीत लिया।
- 03'मदर इंडिया' 1957 में रिलीज हुई, जो भारत की तरफ से ऑस्कर के लिए नॉमिनेट होने वाली पहली फिल्म बनी।
- 04महबूब खान की फिल्मों में महिलाओं को मजबूत और स्वाभिमानी किरदारों में दिखाया गया।
- 05उन्होंने 1964 में 56 साल की उम्र में निधन किया, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है।
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महबूब खान, भारतीय सिनेमा के एक अद्वितीय निर्देशक, का सफर गुजरात के एक छोटे से गांव से शुरू होकर मुंबई के 'महबूब स्टूडियो' और फिर ऑस्कर के मंच तक पहुंचा। उनका जुनून सिनेमा के प्रति बचपन से ही था, जिससे प्रभावित होकर उन्होंने कई रातें रेलवे प्लेटफॉर्म पर बिताईं। महबूब खान ने 1935 में अपनी पहली फिल्म 'अल हिलाल' बनाई, जिसे दर्शकों ने सराहा। उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ 1957 में आया, जब उन्होंने 'मदर इंडिया' बनाई, जो एक मां के संघर्ष की कहानी थी। यह फिल्म भारत की तरफ से ऑस्कर के लिए नॉमिनेट होने वाली पहली फिल्म बनी। महबूब खान ने न केवल बेहतरीन फिल्में दीं, बल्कि 'महबूब स्टूडियो' जैसे आधुनिक स्टूडियो का निर्माण भी किया। 28 मई 1964 को उनका निधन हुआ, लेकिन 'मदर इंडिया' जैसी फिल्म के माध्यम से उनकी विरासत आज भी जीवित है।
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