पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
'कैदियों के पास मोबाइल कैसे?' हाईकोर्ट ने जेल प्रशासन को लगाई कड़ी फटकार; व्यवस्था पर उठाए सवाल
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पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक मामले में आरोपित को जमानत देते हुए हरियाणा के जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि यदि कैदी मोबाइल फोन के जरिए आपराधिक गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
- 01जेल प्रशासन को आत्ममंथन करने की सलाह दी गई है।
- 02कोर्ट ने कहा कि कैदियों का मोबाइल फोन के जरिए आपराधिक गतिविधियों में शामिल होना चिंताजनक है।
- 03आरोपित आकाश उर्फ रिंकू को जमानत दी गई है।
- 04जेल प्रशासन की लापरवाही या मिलीभगत का सवाल उठाया गया।
- 05ट्रायल कोर्ट को मामले का शीघ्र निपटारा करने के निर्देश दिए गए हैं।
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पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े एक मामले में आरोपित आकाश उर्फ रिंकू को नियमित जमानत देते हुए हरियाणा के जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि यदि कोई कैदी हिरासत में रहते हुए मोबाइल फोन के माध्यम से आपराधिक गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो यह अत्यंत चिंताजनक है। जस्टिस संजय वशिष्ठ की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि जेल प्रशासन को इस मामले में आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। मामले में आरोपित ने दलील दी थी कि उसके खिलाफ ठोस साक्ष्य नहीं हैं और वह केवल पुलिस रिकार्ड में नामित किया गया है। अदालत ने निर्देश दिया कि यदि भविष्य में आरोपित समान गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसकी जमानत रद की जा सकती है। इसके साथ ही, ट्रायल कोर्ट को मामले का स्वतंत्र और शीघ्र निपटारा करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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इस निर्णय से जेल प्रशासन को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने की आवश्यकता महसूस होगी, जिससे भविष्य में कैदियों की गतिविधियों पर बेहतर निगरानी हो सकेगी।
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