बिलासपुर के खोंधरा जंगल में वन्यजीवों की मौत पर उठे सवाल
बिलासपुर: सीपत के खोंधरा जंगल में वन्यजीवों की लगातार मौत, नौ माह में सात चीतल की गई जान; वन विभाग पर उठे सवाल
Amar Ujala
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बिलासपुर जिले के सीपत क्षेत्र के खोंधरा और सोंठी जंगलों में पिछले नौ महीनों में सात चीतलों की मौत हुई है, जिससे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग ने वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं।
- 01खोंधरा जंगल में पिछले 9 महीनों में 7 चीतल की मौत हुई है।
- 02स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग की निगरानी कमजोर है।
- 03गर्मी के कारण वन्यजीव पानी की तलाश में गांवों की ओर आ रहे हैं।
- 04कुत्तों के हमले से चीतलों की मौत का खतरा बढ़ गया है।
- 05वन विभाग ने जल स्रोतों के लिए प्रस्ताव तैयार किया है।
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बिलासपुर जिले के सीपत क्षेत्र के खोंधरा और सोंठी जंगलों में वन्यजीवों की लगातार मौतों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में खोंधरा जंगल में एक नर चीतल का शव मिलने के बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग पर आरोप लगाया कि वह समय पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था करने में विफल रहा है। पिछले नौ महीनों में कुत्तों के हमले से करीब 7 चीतलों की जान जा चुकी है। गर्मी के दौरान पानी की कमी के कारण वन्यजीव गांवों की ओर आ रहे हैं, जिससे उनकी जान को खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकारी भी जंगल में सक्रिय हैं, जबकि वन विभाग की गश्त न के बराबर है। वन मंडल अधिकारी नीरज कुमार ने बताया कि जंगलों में पानी की व्यवस्था के लिए प्रस्ताव बनाया गया है और जल्द ही इस पर काम शुरू होगा।
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यदि वन विभाग समय पर कार्रवाई नहीं करता है, तो वन्यजीवों की मौतों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे स्थानीय पारिस्थितिकी प्रभावित होगी।
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