नीला यालम: नक्सली हमले के बाद चार बेटियों के लिए बनी प्रेरणा
मदर्स डे: नक्सली हमले में पति खोने के बाद नीला यालम ने अकेले लड़ी जंग, चार बेटियों को पढ़ाकर बनाया काबिल
Amar Ujala
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भोपालपटनम की नीला यालम ने अपने पति की मौत के बाद चार बेटियों को अकेले पालने और पढ़ाने की जिम्मेदारी उठाई। नक्सली हमले में पति की हत्या के बाद, उन्होंने कठिनाइयों का सामना करते हुए अपने बच्चों के भविष्य को संवारने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
- 01नीला यालम ने पति की मौत के बाद चार बेटियों की जिम्मेदारी उठाई।
- 02उन्होंने अपने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी और उन्हें काबिल बनाया।
- 03नीला का संघर्ष पूरे इलाके में प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
- 04बड़ी बेटी वंशिका यालम अब लैब टेक्नीशियन बन चुकी हैं।
- 05नीला यालम का साहस और मातृत्व सभी के लिए एक मिसाल है।
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भोपालपटनम की नीला यालम ने अपने पति रामचंद्रम यालम की नक्सली हमले में हुई मौत के बाद चार बेटियों की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। 12 अप्रैल 2014 को हुए इस हमले ने उनके जीवन को बदल दिया, लेकिन नीला ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई को कभी रुकने नहीं दिया और हर मुश्किल समय में उनका हौसला बनी रहीं। उनकी बड़ी बेटी वंशिका अब रायपुर में पढ़ाई कर लैब टेक्नीशियन बन चुकी हैं। नीला यालम का संघर्ष और मातृत्व आज पूरे इलाके में एक प्रेरणा बन चुका है, और लोग उन्हें सम्मान के साथ याद करते हैं।
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नीला यालम की कहानी ने न केवल उनके बच्चों के भविष्य को संवारने में मदद की, बल्कि पूरे समुदाय में मातृत्व और साहस का एक उदाहरण प्रस्तुत किया।
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