तमिलनाडु चुनाव: क्या राज्य की तिजोरी कल्याणकारी वादों का बोझ सह सकेगी?
Tamil Nadu Elections: मुफ्त लैपटॉप से लेकर ₹10,000 नकद तक, क्या वादों का बोझ सह पाएगी राज्य की तिजोरी?
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तमिलनाडु में 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव हो रहे हैं, जहां द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) जैसे प्रमुख दल कल्याणकारी वादों के साथ चुनावी मैदान में हैं। हालांकि राज्य की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है, लेकिन क्या यह वादों का बोझ सहन कर सकेगी, यह एक बड़ा सवाल है।
- 01तमिलनाडु में 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव होंगे।
- 02DMK और AIADMK ने महिलाओं और युवाओं के लिए कई कल्याणकारी वादे किए हैं।
- 03राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 39.26% बढ़ा है।
- 04राजस्व घाटा वित्त वर्ष 2026 में GSDP का 1.94% हो गया है।
- 05राज्य की वित्तीय स्थिति में सुधार हो रहा है, लेकिन कल्याणकारी वादों का बोझ चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
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तमिलनाडु में 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों में द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (AIADMK) जैसे प्रमुख दल कल्याणकारी वादों के साथ चुनावी मैदान में हैं। DMK ने महिलाओं के लिए घरेलू उपकरणों के कूपन और कॉलेज के छात्रों के लिए मुफ्त लैपटॉप देने का वादा किया है। वहीं, AIADMK ने प्रति परिवार ₹10,000 की एकमुश्त सहायता और राशन कार्ड धारकों के लिए मुफ्त रेफ्रिजरेटर की पेशकश की है। आर्थिक प्रदर्शन में सुधार के संकेत हैं, जहां राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) वित्त वर्ष 2020 से 2025 के बीच 39.26% बढ़ा है। हालांकि, हालिया अंतरिम बजट में राज्य के कर राजस्व में गिरावट की आशंका जताई गई है, जो वित्त वर्ष 2027 में 5.64% तक गिर सकता है। यदि राजनीतिक दल कल्याणकारी वादों में आपसी प्रतिस्पर्धा करते हैं, तो वित्तीय अनुशासन बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
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यदि राजनीतिक दलों के कल्याणकारी वादे पूरे होते हैं, तो यह राज्य की वित्तीय स्थिति पर दबाव डाल सकता है।
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