पहलगाम हमले में 26 पर्यटकों की मौत, स्थानीय पोनीवाले ने सुनाई दिल दहला देने वाली कहानी
'हर तरफ लाशें थीं', पहलगाम हमले का खौफनाक मंजर; सबसे पहले पहुंचने वाले शख्स ने सुनाई दिल दहला देने वाली कहानी
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Image: Jagran
22 अप्रैल को पहलगाम, जम्मू और कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले में 26 पर्यटकों और एक स्थानीय पोनीवाले की जान गई। अब्दुल वहीद वानी, जो पहले मौके पर पहुंचे, ने हमले के भयावह दृश्य और घायलों की मदद की कहानी साझा की।
- 0122 अप्रैल को पहलगाम में आतंकवादी हमला हुआ
- 02हमले में 26 पर्यटकों और एक स्थानीय पोनीवाले की मौत हुई
- 03अब्दुल वहीद वानी ने सबसे पहले मौके पर पहुंचकर मदद की
- 04घायलों की मदद के लिए 700 पोनीवालों को बुलाया गया
- 05वानी के अनुसार, हमले का दृश्य बेहद भयावह था
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22 अप्रैल को पहलगाम, जम्मू और कश्मीर के बैसरन घाटी में हुए आतंकवादी हमले ने 26 पर्यटकों और एक स्थानीय पोनीवाले की जान ले ली। अब्दुल वहीद वानी, जो उस समय पास के गांव में थे, सबसे पहले मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि वहां का दृश्य भयावह था, हर तरफ लाशें बिखरी थीं और लोग रो रहे थे। वानी ने घायलों की मदद के लिए अपने व्हाट्सएप ग्रुप में 700 पोनीवालों को बुलाया, लेकिन सुरक्षा कारणों से केवल 15 लोग ही वहां पहुंच सके। उन्होंने घायलों को संभाला और लाशों को एक जगह इकट्ठा किया। वानी के अनुसार, कई शवों पर गोली लगी थी, जिससे स्थिति और भी भयानक हो गई थी। उन्होंने एक घायल व्यक्ति को भी देखा, जो सात शवों के बीच जिंदा था। वानी ने कहा कि उस दिन की घटनाएं आज भी उन्हें परेशान करती हैं।
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यह हमला स्थानीय पर्यटन और सुरक्षा पर गहरा प्रभाव डालेगा, जिससे पर्यटकों की संख्या में कमी आ सकती है।
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