राजस्थान की पचपदरा रिफाइनरी: ऊर्जा सुरक्षा में नया अध्याय
पचपदरा का पावरहाउस: न्यूजीलैंड-वियतनाम भी पीछे, इतना पेट्रोल-डीजल तैयार करेगी पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी, 3 मिनट में समझिए क्यों है खास?
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राजस्थान के बालोतरा में स्थापित होने वाली पचपदरा रिफाइनरी, जो 9 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल की वार्षिक क्षमता रखती है, भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह रिफाइनरी पेट्रोकेमिकल उत्पादों का भी उत्पादन करेगी, जिससे हजारों रोजगार सृजित होंगे।
- 01पचपदरा रिफाइनरी की वार्षिक क्षमता 9 मिलियन मीट्रिक टन है।
- 02यह रिफाइनरी भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी।
- 03पेट्रोकेमिकल यूनिट की क्षमता 2.4 मिलियन मीट्रिक टन है।
- 04इस परियोजना में 79,450 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।
- 05यह रिफाइनरी हजारों रोजगार के अवसर पैदा करेगी।
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राजस्थान के बालोतरा में स्थापित होने वाली पचपदरा रिफाइनरी, भारत की पहली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी है, जिसकी वार्षिक क्षमता 9 मिलियन मीट्रिक टन (9 MMTPA) होगी। यह रिफाइनरी हर दिन लगभग 1.8 लाख बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करेगी, जो न्यूज़ीलैंड और वियतनाम की कुल रिफाइनिंग क्षमता के बराबर है। इस रिफाइनरी का निर्माण हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और राजस्थान सरकार के सहयोग से किया जा रहा है, जिसमें HPCL की 74% और राजस्थान सरकार की 26% हिस्सेदारी है। इस परियोजना पर 79,450 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। पचपदरा रिफाइनरी न केवल पेट्रोल और डीजल का उत्पादन करेगी, बल्कि इसका पेट्रोकेमिकल यूनिट भी हर साल 2.4 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादों का उत्पादन करेगा। यह परियोजना उत्तर-पश्चिम भारत के लिए एक औद्योगिक इंजन के रूप में कार्य करेगी, जिससे हजारों छोटे उद्योगों का विकास होगा।
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पचपदरा रिफाइनरी से राजस्थान और पड़ोसी राज्यों की पेट्रोलियम मांग को पूरा किया जाएगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में सुधार होगा।
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