भारत की तुलना में ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी का बढ़ता दबदबा
MSCI EM इंडेक्स में पैसिव निवेश खींचने में भारत पर भारी पड़ी अकेली ताइवानी कंपनी
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ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (टीएसएमसी) ने एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स में भारत को पीछे छोड़ते हुए 14.2% का भार हासिल किया है, जबकि भारत का भार 11.94% है। इस बदलाव से टीएसएमसी ने अधिक पैसिव निवेश आकर्षित किया है, जिससे भारत की स्थिति कमजोर हुई है।
- 01टीएसएमसी का भार 14.2% है, जो भारत के 11.94% से अधिक है।
- 02भारत का भार एमएससीआई ईएम इंडेक्स में छह साल में सबसे कम है।
- 03टीएसएमसी ने एआई ट्रेडिंग में बढ़ती रुचि के चलते अपनी स्थिति मजबूत की है।
- 04भारत को आम सहमति से अंडरवेट माना जा रहा है।
- 05एमएससीआई ईएम इंडेक्स में टीएसएमसी का भार पिछले 30 वर्षों में किसी भी एक कंपनी का सबसे अधिक है।
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ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (टीएसएमसी) ने एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट (ईएम) इंडेक्स में भारत पर बढ़त हासिल कर ली है। टीएसएमसी का भार 14.2% है, जबकि भारत का भार 11.94% है, जो पिछले छह वर्षों में सबसे कम है। इस बदलाव से टीएसएमसी ने अधिक पैसिव निवेश आकर्षित किया है। टीएसएमसी की सफलता का मुख्य कारण एआई ट्रेडिंग में बढ़ती रुचि है, जिससे उसने टेक और एआई निवेश में उत्साह के बीच अपनी स्थिति को मजबूत किया है। अनुमान है कि 750 अरब डॉलर से अधिक की संपत्ति वाले पैसिव निवेश इस इंडेक्स को ट्रैक करते हैं। भारत को अब आम सहमति से अंडरवेट माना जा रहा है, जबकि दक्षिण कोरिया और ताइवान को ओवरवेट माना गया है। एकेडियन ऐसेट मैनेजमेंट ने चिंता जताई है कि टीएसएमसी का भार एमएससीआई ईएम इंडेक्स में पिछले 30 वर्षों में किसी भी एक कंपनी का सबसे अधिक है, जिससे बेंचमार्क पहले से कहीं ज्यादा एक पर केंद्रित हो गया है।
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भारत के निवेशकों को टीएसएमसी की बढ़ती स्थिति के कारण अपने निवेश के विकल्पों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।
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