सुप्रीम कोर्ट ने नफरत फैलाने वाले भाषणों पर अतिरिक्त दिशा निर्देश जारी करने से किया इनकार
'अदालतें कानून की व्याख्या तो कर सकती हैं, लेकिन कानून नहीं बना सकतीं', सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने नफरत फैलाने वाले भाषणों पर रोक लगाने के लिए अतिरिक्त दिशा निर्देश जारी करने से इनकार किया है। कोर्ट ने कहा कि नफरती भाषणों से संबंधित मुद्दे कानून के अभाव से नहीं, बल्कि उसके सही कार्यान्वयन की कमी से उत्पन्न होते हैं।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने नफरत फैलाने वाले भाषणों पर दिशा निर्देश जारी करने से किया इनकार।
- 02कोर्ट ने कहा कि मौजूदा कानून नफरती भाषणों से निपटने के लिए पर्याप्त है।
- 03नफरती भाषणों के मुद्दे कानून के अभाव से नहीं, बल्कि उसके सही कार्यान्वयन से उत्पन्न होते हैं।
- 04कोर्ट ने कहा कि विधायिका को समाज में उभरती चुनौतियों पर विचार करने की स्वतंत्रता है।
- 05अवमानना की याचिकाएं भी कोर्ट ने खारिज कर दीं।
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नफरत फैलाने वाले भाषणों पर अतिरिक्त दिशा निर्देश जारी करने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि नफरती भाषणों के संबंध में कोई कानूनी खालीपन नहीं है और मौजूदा आपराधिक कानून इस मुद्दे से निपटने के लिए पर्याप्त है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संवैधानिक अदालतें कानून की व्याख्या कर सकती हैं, लेकिन कानून नहीं बना सकतीं। कोर्ट ने केंद्र और सक्षम विधायी प्राधिकरणों को समाज में उभरती चुनौतियों के आलोक में आवश्यक विधायी या नीतिगत उपायों पर विचार करने की स्वतंत्रता दी। इसके साथ ही, अवमानना की याचिकाएं भी निबटाई गईं।
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इस निर्णय से नफरत फैलाने वाले भाषणों के मामलों में मौजूदा कानूनों के सही कार्यान्वयन पर जोर दिया गया है, जिससे समाज में शांति और भाईचारे को बढ़ावा मिलेगा।
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