सुप्रीम कोर्ट ने रेप पीड़िता के गर्भपात पर कानून में बदलाव की आवश्यकता बताई
रेप से गर्भवती होने पर डिलीवरी के लिए बाध्य नहीं कर सकते, कानून में हो बदलाव: SC
Ndtv
Image: Ndtv
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 15 साल की रेप पीड़िता के गर्भपात के मामले में केंद्र सरकार को गर्भपात कानून में बदलाव करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि नाबालिग को उसकी इच्छा के खिलाफ गर्भ जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और नागरिकों के फैसलों का सम्मान होना चाहिए।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात कानून में बदलाव की आवश्यकता बताई।
- 02नाबालिग को उसकी इच्छा के खिलाफ गर्भ जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
- 03अदालत ने कहा कि नागरिकों के फैसलों का सम्मान होना चाहिए।
- 04पीड़िता की मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए गर्भपात की अनुमति दी गई।
- 05सरकार को इस मामले में याचिका दाखिल करने का अधिकार नहीं है।
Advertisement
In-Article Ad
गुरुवार को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 15 साल की रेप पीड़िता के 31 हफ्ते के गर्भ को समाप्त करने के मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि नाबालिग को उसकी इच्छा के खिलाफ गर्भ जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और गर्भपात कानून में बदलाव की आवश्यकता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी कहा कि नागरिकों के फैसलों का सम्मान होना चाहिए। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने गर्भपात के खिलाफ दलील दी, लेकिन अदालत ने पीड़िता की मानसिक स्थिति पर चिंता जताते हुए गर्भपात की अनुमति दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रजनन संबंधी निर्णय लेने का अधिकार व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता का हिस्सा है। इस मामले में, पीड़िता की मानसिक स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित थी, जिससे अदालत ने गर्भपात को उचित ठहराया।
Advertisement
In-Article Ad
इस फैसले से नाबालिग पीड़िताओं को उनके अधिकारों की रक्षा में मदद मिलेगी और उन्हें अपनी इच्छाओं के अनुसार निर्णय लेने का अवसर मिलेगा।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि गर्भपात कानून में बदलाव आवश्यक है?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।

-1777538549327.webp&w=1200&q=75)


