सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: अस्थायी कर्मियों के लिए पेंशन संवैधानिक अधिकार
'पेंशन खैरात नहीं, संवैधानिक अधिकार'; अस्थायी कर्मियों के हक में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
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Image: Jagran
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों की तरह अधिकार मिलना चाहिए। पेंशन कोई खैरात नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीन महीने में पेंशन का भुगतान करने का आदेश दिया है।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी कर्मियों के समान अधिकार देने का आदेश दिया।
- 02कोर्ट ने कहा कि पेंशन कर्मचारी की मेहनत की कमाई है, न कि खैरात।
- 03डाक विभाग के अस्थायी कर्मियों को 1991 की योजना के तहत नियमित करने का निर्देश दिया गया था।
- 04सरकार को तीन महीने में पेंशन और अन्य लाभों का भुगतान करना होगा।
- 05भुगतान में देरी पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने की चेतावनी दी गई।
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सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि कोई भी सरकारी विभाग अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी कर्मियों की तरह काम लेकर उनके अधिकारों और पेंशन से वंचित नहीं कर सकता। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ए.जी. मसीह की पीठ ने स्पष्ट किया कि समान काम के लिए अधिकार छीनना नाइंसाफी है। कोर्ट ने कहा कि पेंशन खैरात नहीं, बल्कि यह एक संवैधानिक अधिकार है, जो संविधान के अनुच्छेद 300ए के तहत संपत्ति के समान है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह इन अस्थायी कर्मचारियों की पेंशन और सेवानिवृत्ति के अन्य लाभों की गणना करे और तीन महीने के भीतर भुगतान करे। यदि भुगतान नहीं किया गया, तो विभाग को बकाया राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज देना होगा। यह निर्णय अस्थायी श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
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इस फैसले से अस्थायी कर्मचारियों को उनके अधिकारों की सुरक्षा मिलेगी और उन्हें पेंशन का लाभ मिलेगा।
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