भारत का जल कूटनीति में सख्त रुख, सिंधु जल संधि पर पुनर्विचार की आवश्यकता
PAK पर भारत का 'वॉटर-स्ट्राइक'... सिंधु जल संधि निलंबन के एक साल पूरे, जानें क्या-क्या बदला
Aaj Tak
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भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल संधि (IWT) को निलंबित करने के एक साल में जल कूटनीति में कड़े कदम उठाए हैं। भारत ने अपने जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग के लिए बुनियादी ढांचे में तेजी से सुधार किया है और पाकिस्तान के साथ डेटा साझा करना बंद कर दिया है।
- 01सिंधु जल संधि का निलंबन एक साल पूरा हुआ।
- 02भारत ने जल संसाधनों के उपयोग के लिए बुनियादी ढांचे में तेजी लाई है।
- 03पाकिस्तान को पानी के बहाव का डेटा देना बंद किया गया।
- 04जलवायु परिवर्तन और बढ़ती जनसंख्या के कारण संधि पर पुनर्विचार की आवश्यकता।
- 05भारत का स्पष्ट संदेश: आतंकवाद और जल कूटनीति एक साथ नहीं चल सकते।
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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty - IWT) को निलंबित करने का निर्णय लिया था, जो अब एक साल पूरा हो गया है। इस दौरान, भारत ने जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग के लिए बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व सुधार किए हैं। जलविद्युत परियोजनाओं के विकास के लिए योजनाएँ बनाई गई हैं, जिसमें पक्कलडुल और किरू परियोजनाएँ शामिल हैं। भारत ने 1960 के बाद पहली बार पाकिस्तान को पानी के बहाव का डेटा देना बंद कर दिया है, जिससे जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। भारत का मानना है कि बढ़ती जनसंख्या और जलवायु परिवर्तन के कारण इस संधि पर पुनर्विचार की आवश्यकता है, जबकि पाकिस्तान इसमें बाधाएं उत्पन्न कर रहा है। भारत का स्पष्ट संदेश है कि जब तक सीमा पार आतंकवाद नहीं रुकता, जल कूटनीति पर उसका सख्त रुख बरकरार रहेगा।
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भारत के जल कूटनीति के सख्त रुख से पाकिस्तान पर जल संकट का खतरा मंडरा सकता है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में जल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
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