चीन के स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई का नर्क: 14 घंटे की दिनचर्या और बढ़ता मानसिक तनाव
यहां सुबह से रात तक पढ़ते हैं बच्चे, बीमारी में भी पूरा करते हैं होमवर्क, नर्क से कम नहीं है चीन के ये स्कूल
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चीन के स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई की दिनचर्या अत्यधिक कठिन होती जा रही है, जिसमें कई छात्र 14 घंटे तक स्कूल में बिताते हैं। इस दबाव के चलते बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं, जबकि सरकार ने सुधार के लिए नई नीतियां लागू की हैं।
- 01चीन के स्कूलों में बच्चे 14 घंटे तक पढ़ाई करते हैं।
- 02गाओकाओ परीक्षा के दबाव के कारण शिक्षा प्रणाली सख्त है।
- 03बच्चों को बीमारी में भी स्कूल जाने और होमवर्क पूरा करने के लिए मजबूर किया जाता है।
- 04नींद की कमी और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं।
- 05सरकार ने सुधार के लिए नई नीतियां लागू की हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में बदलाव नहीं आया।
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चीन के स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई की दिनचर्या अत्यधिक कठिन हो गई है। एलिमेंट्री स्तर के छात्र सुबह 7 बजे से लेकर शाम 6-7 बजे तक स्कूल में रहते हैं, जबकि हाई स्कूल के छात्र कई बार 14 घंटे तक पढ़ाई करते हैं। इस अत्यधिक दबाव के कारण बच्चे मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जिसमें तनाव, एंग्जायटी और आत्महत्या की घटनाएं शामिल हैं। गाओकाओ परीक्षा, जो कि विश्वविद्यालय में प्रवेश का एकमात्र मापदंड है, इस सख्त शिक्षा प्रणाली का मुख्य कारण है। हाल ही में, चीनी सरकार ने 2021 में डबल रिडक्शन पॉलिसी लागू की थी, जिसमें ट्यूशन सेंटर पर रोक और होमवर्क कम करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद, कई स्कूल पुराने तरीके से पढ़ाई कर रहे हैं, जिससे बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है।
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इस शिक्षा प्रणाली के कारण बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, जिससे तनाव और आत्महत्या की घटनाएं बढ़ रही हैं।
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