सिक्किम में आनंद कारज अधिनियम 1 जून से लागू, सिख विवाहों का पंजीकरण अब संभव
सिक्किम में 1 जून से लागू होगा आनंद कारज अधिनियम, अब सिख विवाहों का सीधा पंजीकरण संभव

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सिक्किम में 1 जून 2026 से आनंद कारज अधिनियम लागू होगा, जिससे सिख जोड़ों को अपने पारंपरिक विवाह को सीधे पंजीकृत करने की अनुमति मिलेगी। यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद संभव हुआ है, जिससे अब तक सिख जोड़े हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पंजीकरण कराते थे।
- 01आनंद कारज अधिनियम, 1909 के प्रविधानों को 1 जून 2026 से सिक्किम में लागू किया जाएगा।
- 02सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने इस अधिनियम के कार्यान्वयन को तेज किया है।
- 03सिक्किम में अब तक सिख विवाहों का पंजीकरण हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत होता था।
- 04केंद्रीय कानून मंत्रालय ने 14 मई को इस अधिनियम की लागू होने की तिथि की अधिसूचना जारी की।
- 05आनंद कारज अधिनियम के तहत विवाहों के पंजीकरण के लिए राज्य स्तर का तंत्र 2012 में पेश किया गया था।
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सिक्किम में 1 जून 2026 से आनंद कारज अधिनियम लागू होगा, जो सिख जोड़ों को अपने पारंपरिक विवाह समारोह 'आनंद कारज' को सीधे पंजीकृत करने की अनुमति देगा। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लिया गया है, जिससे पहले सिख जोड़े अपने विवाहों का पंजीकरण हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत कराते थे। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने 14 मई को इस अधिनियम की लागू होने की तिथि की अधिसूचना जारी की। आनंद कारज अधिनियम, 1909 के प्रविधानों को लागू करने की प्रक्रिया को तेज करने में सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अधिनियम के तहत विवाहों के पंजीकरण के लिए राज्य स्तर का तंत्र 2012 में पेश किया गया था, लेकिन सिक्किम समेत कई राज्यों ने इसके लिए नियम नहीं बनाए थे। अब, सिक्किम ने आधिकारिक सिक्किम आनंद कारज पंजीकरण नियम, 2026 को तैयार और अधिसूचित किया है, जिससे सिख समुदाय के सदस्यों को अपने विवाहों को पारंपरिक तरीके से पंजीकृत करने में आसानी होगी।
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इस अधिनियम के लागू होने से सिख जोड़ों को अपने विवाहों का पंजीकरण पारंपरिक तरीके से करने में सुविधा होगी।
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