पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण: राजनीतिक बदलाव और जाति जनगणना का महत्व
कानून और राजनीति के बीच उलझा पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण, क्या जाति जनगणना से निकलेगा हल
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पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार ने ओबीसी आरक्षण को 17% से घटाकर 7% कर दिया है, जो 2010 से पहले की स्थिति है। इस निर्णय को संवैधानिक मर्यादाओं के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है। आगामी 2027 की जाति जनगणना इस मुद्दे का समाधान निकालने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
- 01पश्चिम बंगाल में ओबीसी आरक्षण की नई व्यवस्था 2010 से पहले की स्थिति में लौट आई है, जिसमें 66 जातियों को शामिल किया गया है।
- 02कलकत्ता हाई कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण को लेकर 2010 में किए गए बदलाव को निरस्त कर दिया था, जिससे सरकार की कार्यपालिका की शक्तियों पर सवाल उठे।
- 03सरकार ने ओबीसी-ए और ओबीसी-बी में जातियों का वर्गीकरण किया था, जिसमें कई मुस्लिम उप-जातियाँ शामिल थीं।
- 04आगामी 2027 की जनगणना में जातियों की गिनती की जाएगी, जो ओबीसी आरक्षण के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान कर सकती है।
- 05सामाजिक न्याय की नीतियों की स्थिरता के लिए वैज्ञानिक आंकड़े और विधायी खुलापन आवश्यक हैं।
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पश्चिम बंगाल की बीजेपी सरकार ने ओबीसी आरक्षण को 17% से घटाकर 7% कर दिया है, जो 2010 से पहले की स्थिति है। इस निर्णय को संवैधानिक मर्यादाओं के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या सामाजिक न्याय केवल राजनीतिक गणित का शिकार बन गया है। 2011 में तृणमूल कांग्रेस की सरकार ने ओबीसी आरक्षण को बढ़ाकर 17% किया था, जिसमें ओबीसी-ए और ओबीसी-बी में जातियों का वर्गीकरण किया गया। कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस बदलाव को चुनौती देते हुए 2024 में एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया, जिसमें कहा गया कि कार्यपालिका की शक्तियाँ संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) के तहत सीमित हैं। अब, केवल तीन मुस्लिम जातियाँ ओबीसी सूची में शामिल हैं। आगामी 2027 की जनगणना में जातियों की गिनती की जाएगी, जो इस मुद्दे का समाधान निकालने में महत्वपूर्ण हो सकती है। इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि सामाजिक न्याय की नीतियाँ तभी स्थिरता प्राप्त कर सकती हैं, जब वे प्रशासनिक दक्षता और संस्थागत मर्यादा के ढांचे के भीतर तैयार की जाएं।
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इस निर्णय का सीधा प्रभाव ओबीसी समुदायों पर पड़ेगा, जो शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
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