सत्यजीत रे की पहली फिल्म 'पाथेर पांचाली' के पीछे का संघर्ष
71 साल पुरानी सुपरहिट फिल्म को बनाने के लिए डायरेक्टर ने गिरवी रखी जीवन बीमा पॉलिसी, दोस्तों से उधार लिए थे पैसे
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भारतीय फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे ने अपनी पहली फिल्म 'पाथेर पांचाली' बनाने के लिए आर्थिक संघर्ष किया। उन्होंने अपनी जीवन बीमा पॉलिसी गिरवी रखी और दोस्तों से पैसे उधार लिए। यह फिल्म 1955 में रिलीज हुई और कान्स फिल्म फेस्टिवल में पुरस्कार जीता।
- 01सत्यजीत रे ने 'पाथेर पांचाली' बनाने के लिए अपनी जीवन बीमा पॉलिसी गिरवी रखी।
- 02फिल्म की शूटिंग के दौरान कई बार पैसे खत्म होने के कारण रुकावट आई।
- 03यह फिल्म 1955 में रिलीज हुई और कान्स फिल्म फेस्टिवल में पुरस्कार जीता।
- 04सत्यजीत रे ने 1981 तक लगभग हर साल एक फिल्म बनाई।
- 05उनकी फिल्मों ने भारतीय समाज के मुद्दों को यथार्थवादी तरीके से प्रस्तुत किया।
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सत्यजीत रे (भारतीय फिल्म निर्देशक) की पहली फिल्म 'पाथेर पांचाली' आज भी विश्व सिनेमा में एक मील का पत्थर मानी जाती है। इस फिल्म को बनाने के लिए उन्होंने अपनी जीवन बीमा पॉलिसी गिरवी रखी और दोस्तों से पैसे उधार लिए। सत्यजीत रे ने प्रोड्यूसर्स को मनाने के लिए अपनी नोटबुक में फिल्म के दृश्यों के स्केच दिखाए। 27 अक्टूबर 1952 को फिल्म का पहला दृश्य शूट किया गया, जिसमें अपू और दुर्गा काश के खेत में भागते हुए रेलगाड़ी देखने जाते हैं। फिल्म 26 अगस्त 1955 को कोलकाता में रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस पर सफल रही। इसने 1956 में कान्स फिल्म फेस्टिवल में स्पेशल जूरी अवॉर्ड जीता। सत्यजीत रे ने 1981 तक लगभग हर साल एक फिल्म बनाई, जिसमें 'परश पाथर', 'देवी', 'चारुलता', 'महानगर', 'शतरंज के खिलाड़ी' और 'घरे बाइरे' शामिल हैं। उन्हें 1992 में लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए ऑस्कर पुरस्कार और भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
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सत्यजीत रे की फिल्मों ने भारतीय समाज के मुद्दों को उजागर किया, जिससे आम लोगों की सोच और दृष्टिकोण में बदलाव आया।
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