जम्मू-कश्मीर में इंजीनियरिंग शिक्षा में गिरावट, 2439 सीटों के मुकाबले केवल 1263 छात्रों ने दिया परीक्षा
CET में रिकॉर्ड गिरावट, 2439 सीटें-1263 छात्र, प्लेसमेंट के बिना जम्मू-कश्मीर में इंजीनियरिंग 'अधूरा प्रोजेक्ट'
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जम्मू-कश्मीर में इंजीनियरिंग कालेजों में छात्रों की संख्या में कमी आई है, जहां 2439 सीटों के मुकाबले केवल 1263 छात्रों ने कामन एंट्रेंस टेस्ट दिया। प्लेसमेंट की कमी और नए कोर्स न शुरू करने के कारण युवा अन्य राज्यों की ओर बढ़ रहे हैं।
- 01जम्मू-कश्मीर में इंजीनियरिंग कालेजों में छात्रों की संख्या में गिरावट आई है।
- 02इस बार 2439 सीटों के मुकाबले केवल 1263 छात्रों ने कामन एंट्रेंस टेस्ट दिया।
- 03प्लेसमेंट की कमी और नए कोर्स न होने से युवा अन्य राज्यों की ओर जा रहे हैं।
- 04पिछले तीन वर्षों में प्रयासों के बावजूद छात्रों की संख्या नहीं बढ़ी है।
- 05सरकारी कालेजों में 630 और निजी कालेजों में 1809 सीटें हैं।
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जम्मू-कश्मीर में इंजीनियरिंग कालेजों में छात्रों का रुझान तेजी से घट रहा है। इस बार 2439 सीटों के मुकाबले केवल 1263 छात्रों ने कामन एंट्रेंस टेस्ट दिया। सरकारी कालेजों में 630 और निजी कालेजों में 1809 सीटें हैं। पिछले तीन वर्षों में, अधिकारियों ने छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए कई बैठकें की हैं, लेकिन इन प्रयासों का कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला है। कई छात्र अब पंजाब, दिल्ली, चंडीगढ़ और अन्य राज्यों की ओर रुख कर रहे हैं, जहां प्लेसमेंट के बेहतर अवसर हैं। जम्मू-कश्मीर के कालेजों में प्लेसमेंट का स्तर संतोषजनक नहीं है, जिससे छात्रों को रोजगार मिलने में कठिनाई हो रही है। पिछले साल भी 50% सीटें खाली रह गई थीं, और इस बार भी स्थिति में सुधार की उम्मीद नहीं है।
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इस गिरावट का सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा, क्योंकि प्लेसमेंट की कमी से उन्हें रोजगार मिलने में कठिनाई होगी।
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