मध्य प्रदेश के गांवों में पानी के लिए संघर्ष करती हैं महिलाएं और बच्चियां
एक-एक बूंद के लिए संघर्ष! पहाड़ का सीना चीर अंदर घुसती है बेटियां, यूं चढ़ाई कर लाती है पानी
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मध्य प्रदेश के धुलकोट क्षेत्र के भग्वानिया गांव में महिलाएं और बच्चियां पानी की कमी के कारण जान जोखिम में डालकर खतरनाक रास्तों से पानी लाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। स्थानीय प्रशासन की योजनाओं के बावजूद, पानी की उपलब्धता में कमी बनी हुई है, जिससे स्वास्थ्य और शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
- 01भग्वानिया गांव में पानी का एकमात्र स्रोत गहरे गड्ढे हैं, जो बेहद खतरनाक हैं।
- 02महिलाएं और 8-10 साल की बच्चियां हर दिन पानी लाने के लिए जोखिम भरे रास्तों से गुजरती हैं।
- 03गंदा पानी पीने से जलजनित रोग और कुपोषण की समस्या बढ़ रही है।
- 04पानी लाने में समय खर्च होने के कारण कई बच्चियां स्कूल नहीं जा पातीं।
- 05सरकार के जल जीवन मिशन के तहत योजनाएं धीमी गति से लागू हो रही हैं।
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मध्य प्रदेश के धुलकोट क्षेत्र के भग्वानिया गांव की महिलाएं और छोटी बच्चियां पानी की गंभीर कमी के चलते हर दिन जान जोखिम में डालकर खतरनाक रास्तों से पानी लाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। यहां का एकमात्र पानी का स्रोत गहरे गड्ढे हैं, जो बेहद खतरनाक हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि इस क्षेत्र में कोई नहर, हैंडपंप या पाइपलाइन नहीं है, जिससे पानी की भारी किल्लत बनी हुई है। गंदा और बदबूदार पानी पीने से जलजनित रोगों का खतरा बढ़ गया है, और बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। पानी लाने में समय खर्च होने के कारण कई बच्चियां स्कूल नहीं जा पातीं, जिससे उनकी शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। सरकार की योजनाएं जैसे जल जीवन मिशन धीमी गति से लागू हो रही हैं, और स्थानीय प्रशासन का कहना है कि भौगोलिक कठिनाइयों के कारण पाइपलाइन बिछाना चुनौतीपूर्ण है।
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पानी की कमी के कारण स्वास्थ्य और शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
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