रांची RIMS में मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ता दबाव
रांची RIMS में मेडिकल छात्रों पर बढ़ता मानसिक दबाव, हर बैच में डिप्रेशन से जूझ रहे विद्यार्थी
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राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), रांची में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र अक्षित कुजूर की आत्महत्या ने मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे को उजागर किया है। रिम्स के डीन ने बताया कि हर बैच में छात्र मानसिक तनाव और डिप्रेशन का सामना कर रहे हैं, और संस्थान इस समस्या के समाधान के लिए कदम उठा रहा है।
- 01रिम्स में पिछले कुछ वर्षों में कई छात्रों ने आत्महत्या की है, जिसमें हाल ही में एक छात्र ने हास्टल में फांसी लगाई थी।
- 02डीन डॉ. शिव प्रिय ने बताया कि छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य के लिए फैकल्टी मेंटर से जोड़ा जाता है।
- 03रिम्स प्रशासन ने योग और मेडिटेशन क्लास शुरू करने की योजना बनाई है, लेकिन छात्रों की भागीदारी कम है।
- 04मनोचिकित्सक डॉ. सिद्धार्थ सिन्हा ने कहा कि छात्रों में अवसाद का मुख्य कारण अपनी समस्याओं को दबाना है।
- 05रिम्स के निदेशक डॉ. राजकुमार ने अभिभावकों से बच्चों के व्यवहार पर ध्यान देने की अपील की है।
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राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स), रांची में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र अक्षित कुजूर की आत्महत्या ने मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर चिंता जताई है। रिम्स के डीन डॉ. शिव प्रिय के अनुसार, हर बैच में कुछ छात्र मानसिक तनाव और डिप्रेशन से जूझ रहे हैं। कई छात्रों का इलाज रिनपास और सीआइपी जैसे संस्थानों में चल रहा है, लेकिन समस्या तब बढ़ जाती है जब छात्र अपनी परेशानियों को साझा नहीं कर पाते। हाल के वर्षों में रिम्स में कई आत्महत्या की घटनाएं हुई हैं, जो इस बात का संकेत देती हैं कि मेडिकल शिक्षा के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता है। रिम्स प्रशासन ने छात्रों की मानसिक और शैक्षणिक स्थिति पर नजर रखने के लिए फैकल्टी मेंटरिंग प्रणाली लागू की है। इसके अलावा, योग और मेडिटेशन क्लास शुरू करने की योजना है। हालांकि, छात्रों की भागीदारी इन कार्यक्रमों में कम है। मनोचिकित्सक डॉ. सिद्धार्थ सिन्हा ने बताया कि प्रतिस्पर्धा और भविष्य के दबाव के कारण छात्रों में अवसाद बढ़ रहा है। रिम्स के निदेशक डॉ. राजकुमार ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों के व्यवहार में बदलाव पर ध्यान दें और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई करें।
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मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने से उनकी पढ़ाई और भविष्य की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
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