सुप्रीम कोर्ट का फैसला: पत्नी से 13 दिन तक बात न करना मानसिक क्रूरता नहीं
पत्नी से मुंह फुलाना और बात न करना... क्रूरता नहीं; पतियों पर मेहरबान सुप्रीम कोर्ट
News 18 Hindi
Image: News 18 Hindi
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने पति-पत्नी के विवाद में फैसला सुनाया है कि पत्नी से 13 दिन तक बात न करना मानसिक क्रूरता नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि शादीशुदा जीवन में मतभेद सामान्य हैं और इसे कानूनी अपराध नहीं माना जा सकता।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी से 13 दिन तक बात न करना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में नहीं आता।
- 02जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंद की बेंच ने पति को बरी किया।
- 03इस व्यक्ति को पहले ट्रायल कोर्ट और मद्रास हाईकोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई थी।
- 04पत्नी की आत्महत्या के मामले में पति पर आरोप था कि उसने 13 दिन तक बात नहीं की।
- 05कोर्ट ने कहा कि पति के व्यवहार को क्रूरता साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं मिला।
Advertisement
In-Article Ad
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि पति द्वारा पत्नी से 13 दिन तक बात न करना मानसिक क्रूरता नहीं माना जा सकता। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंद की बेंच ने एक मामले में पति को बरी करते हुए कहा कि शादीशुदा जीवन में मतभेद और कुछ दिनों तक एक-दूसरे से न बोलना सामान्य है। इस व्यक्ति को पहले ट्रायल कोर्ट और मद्रास हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 498A के तहत तीन साल की सजा सुनाई थी, जिसमें पत्नी की आत्महत्या के मामले में यह आरोप भी था कि पति ने उससे 13 दिनों तक बात नहीं की। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए कहा कि पति के व्यवहार को क्रूरता साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पति-पत्नी के बीच कोई बड़ी लड़ाई या विवाद नहीं हुआ था, जिससे पति को सजा दी जा सके।
Advertisement
In-Article Ad
यह निर्णय परिवारिक विवादों के मामलों में कानूनी दृष्टिकोण को प्रभावित कर सकता है।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
आप सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बारे में क्या सोचते हैं?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।

