राजस्थान में गर्मी में मिर्च खाने के पीछे का वैज्ञानिक कारण
50 से पार तापमान पर भी राजस्थानी क्यों खाते है भर-भरकर मिर्च, क्या ये ठंडी रखती है बॉडी
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राजस्थान में 45-50 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी लोग मिर्च वाला खाना पसंद करते हैं। मिर्च में मौजूद कैप्साइसिन शरीर के तापमान को बढ़ाता है, जिससे पसीना आता है और शरीर ठंडा होता है। यह स्थानीय खानपान की आदतों का हिस्सा है, जो गर्म जलवायु के अनुकूल हैं।
- 01राजस्थान के लोग गर्मियों में भी मिर्ची का सेवन करते हैं, जो उनके खाने का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- 02मिर्च में मौजूद कैप्साइसिन शरीर के तापमान को बढ़ाता है, जिससे पसीना आता है और शरीर ठंडा होता है।
- 03राजस्थानी खानपान में घी, छाछ, बाजरे की रोटी और दही जैसे खाद्य पदार्थ भी शामिल हैं।
- 04गर्मियों में छाछ और दही पेट को ठंडक प्रदान करते हैं, जबकि बाजरा ऊर्जा देता है।
- 05हालांकि, तीखा खाना सभी के लिए फायदेमंद नहीं है, खासकर जिनको पाचन संबंधी समस्याएं हैं।
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राजस्थान की गर्म जलवायु में, जहां तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है, लोग भरपूर मिर्च वाला खाना बड़े चाव से खाते हैं। यह जानकर आश्चर्य होता है कि इतनी गर्मी में तीखा खाना कैसे खाया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, मिर्च में मौजूद कैप्साइसिन नामक यौगिक शरीर के तापमान को बढ़ाता है, जिससे पसीना अधिक आता है और यह प्रक्रिया शरीर को ठंडा करने में मदद करती है। राजस्थान के लोग मसालेदार खाने के आदी होते हैं, जिससे उनका शरीर इस स्वाद के साथ ढल जाता है। इसके अलावा, राजस्थानी भोजन में घी, छाछ, बाजरे की रोटी और दही जैसे तत्व भी शामिल होते हैं, जो गर्मियों में शरीर को संतुलित रखने में सहायक होते हैं। हालांकि, सभी लोगों के लिए अत्यधिक तीखा खाना फायदेमंद नहीं होता, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पाचन संबंधी समस्याएं हैं।
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राजस्थान के लोग गर्मी में भी मिर्च का सेवन करते हैं, जिससे उनकी खानपान की आदतें और स्वास्थ्य प्रभावित होते हैं।
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