भारत ईरान से तेल आपूर्ति समझौते पर विचार कर रहा है: मूडीज
होर्मुज संकट के बीच ईरान से तेल आपूर्ति समझौते कर सकता है भारत: Moodys

Image: Business Standard
भारत समेत अन्य तेल आयातक देश ईरान के साथ द्विपक्षीय बातचीत कर सकते हैं ताकि ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। मूडीज की रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही में कमी के कारण ऊर्जा कीमतें ऊंची और अस्थिर रहेंगी, जिससे भारत की जीडीपी वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
- 01मूडीज ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री आवाजाही 90% से अधिक घट चुकी है।
- 02भारत का लगभग 46% कच्चा तेल आयात पश्चिम एशिया से होता है, जिससे उसकी ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो रही है।
- 03ब्रेंट क्रूड की कीमतें 90-110 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहने की उम्मीद है, जिससे आर्थिक वृद्धि में कमी आ सकती है।
- 04मूडीज ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 0.8 प्रतिशत घटाकर 6 प्रतिशत किया है।
- 05ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से खुदरा और मुख्य महंगाई दोनों में वृद्धि होने की संभावना है।
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भारत और अन्य तेल आयातक देशों के लिए ईरान के साथ द्विपक्षीय बातचीत का विचार सामने आया है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति को सुनिश्चित किया जा सके। मूडीज की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही में 90% से अधिक की कमी आई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी समझौते की संभावना कम है, जिससे होर्मुज स्ट्रेट का पूरी तरह खुलना भी मुश्किल है।
मूडीज ने बताया कि ब्रेंट क्रूड की कीमतें इस साल 90-110 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहने की उम्मीद है, जो कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर में 0.2 से 0.8 प्रतिशत अंक तक की कमी ला सकती है। भारत, जो लगभग 46% कच्चा तेल पश्चिम एशिया से आयात करता है, इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित होगा। इसके अलावा, ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से खुदरा और मुख्य महंगाई में भी वृद्धि होगी, जिससे आर्थिक स्थिति और कठिन हो जाएगी। मूडीज ने भारत की 2026 की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 0.8 प्रतिशत घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया है।
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ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से भारत में महंगाई और आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
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