सुप्रीम कोर्ट में 'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी' पर जस्टिस नागरत्ना की टिप्पणी
'ज्ञान कहीं से भी आए, व्हॉट्सएप यूनिवर्सिटी से नहीं', सबरीमाला मामले में जस्टिस नागरत्ना ने ऐसा क्यों कहा
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सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस बी. वी. नागरत्ना ने 'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी' से मिली जानकारी को स्वीकार नहीं करने की बात कही। वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने ज्ञान के विभिन्न स्रोतों की उपयोगिता पर जोर दिया, जबकि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने लेखों को व्यक्तिगत राय बताया।
- 01सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मामले की सुनवाई जारी है।
- 02जस्टिस नागरत्ना ने 'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी' से मिली जानकारी को खारिज किया।
- 03नीरज किशन कौल ने ज्ञान के विभिन्न स्रोतों की उपयोगिता पर जोर दिया।
- 04मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने लेखों को व्यक्तिगत राय बताया।
- 05संविधान पीठ धर्म और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों पर सुनवाई कर रही है।
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सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मामले की सुनवाई के दौरान, जस्टिस बी. वी. नागरत्ना ने 'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी' से मिली जानकारी को स्वीकार नहीं करने की बात कही। वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने अपनी दलीलों में कहा कि ज्ञान और समझ किसी भी स्रोत से आए, उसे खारिज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस सांसद शशि थरूर के एक लेख का हवाला दिया, जिसमें न्यायिक संयम पर जोर दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि लेख व्यक्तिगत राय होते हैं और न्यायालय पर बाध्यकारी नहीं हो सकते। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने फिर से हस्तक्षेप करते हुए कहा कि 'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी' से मिली जानकारी को स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह संविधान पीठ धर्म, आस्था और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े कई महत्वपूर्ण संवैधानिक सवालों पर सुनवाई कर रही है।
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