बैतूल में आदिवासियों की भूमि पर खतरे को लेकर अधिकारियों से की मुलाकात
‘जमीन छिनी तो बच्चे भी संभालिए आप...', बैतूल में आदिवासियों की पीड़ा सुन भावुक हुए अधिकारी

Image: Zee News
बैतूल जिले में 18 आदिवासी परिवारों ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक से मुलाकात कर अपनी खेती की भूमि को बचाने की गुहार लगाई। यदि उनकी भूमि छिनी गई, तो उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा। अधिकारियों ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है।
- 01आदिवासी परिवारों ने 50 एकड़ भूमि पर वर्षों से खेती की है, जो उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है।
- 02वन विभाग ने हाल ही में भूमि पर तार फेंसिंग और वृक्षारोपण की तैयारी की है, जिससे बेदखली का खतरा बढ़ गया है।
- 03आदिवासी महिलाएं रामबती बाई और रामेश्वर चावरे ने कहा कि भूमि छिनने पर उन्हें अपने बच्चों को वन विभाग को सौंपने पर विचार करना पड़ेगा।
- 04प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुभरंजन सेन ने परिवारों को निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।
- 05बेदखली से बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
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बैतूल जिले के दौरे पर आए प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुभरंजन सेन से 18 आदिवासी परिवारों ने मुलाकात की और अपनी पीड़ा व्यक्त की। इन परिवारों ने बताया कि वे कई वर्षों से 50 एकड़ भूमि पर खेती कर रहे हैं, जो उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है। हाल ही में वन विभाग ने इस भूमि पर तार फेंसिंग कर दी है और वृक्षारोपण की तैयारी की जा रही है, जिससे इन परिवारों को बेदखल करने का खतरा बढ़ गया है। आदिवासी महिलाओं ने कहा कि यदि उनकी भूमि छिनी गई, तो उन्हें अपने बच्चों को वन विभाग को सौंपने पर विचार करना पड़ेगा। सुभरंजन सेन ने परिवारों को आश्वासन दिया कि यदि जांच में यह पाया गया कि वे वर्षों से इस भूमि पर खेती कर रहे हैं, तो उन्हें हटाया नहीं जाएगा। परिवारों का कहना है कि बेदखली से उनके आवास, रोजगार और बच्चों के भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
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यदि आदिवासी परिवारों को बेदखल किया जाता है, तो इससे उनके जीवनयापन, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
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