आसाराम बापू केस: सह-आरोपी शरद चंद्र और शिल्पी को हाई कोर्ट ने किया बरी
Asaram Bapu Case: आसाराम बापू केस में कौन है वो दो सहकारी आरोपी? जिन्हें कोर्ट ने किया बरी, जानें

Image: News 18 Hindi
राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम बापू की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है, जबकि सह-आरोपी शरद चंद्र और हॉस्टल वार्डन शिल्पी को बरी कर दिया गया है। 2013 में एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में यह निर्णय लिया गया।
- 01राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम बापू की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है।
- 02सह-आरोपी शरद चंद्र और शिल्पी को सबूतों के अभाव में बरी किया गया।
- 03मामला 2013 में छिंदवाड़ा आश्रम में एक नाबालिग छात्रा द्वारा दुष्कर्म का आरोप लगाने से शुरू हुआ।
- 04विशेष पॉक्सो कोर्ट ने आसाराम को 2018 में दोषी ठहराया था।
- 05आसाराम की सजा में कोई कटौती नहीं की गई है, और वह जोधपुर सेंट्रल जेल में रहेंगे।
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राजस्थान हाई कोर्ट ने 2013 के नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आसाराम बापू की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। हालांकि, सह-आरोपी शरद चंद्र और हॉस्टल वार्डन शिल्पी उर्फ संचित को बरी कर दिया गया है। कोर्ट ने पाया कि इन दोनों के खिलाफ मुख्य साजिश में शामिल होने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। यह मामला तब शुरू हुआ था जब एक नाबालिग छात्रा ने आसाराम पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 2018 में आसाराम को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद आसाराम की आगे की जिंदगी जेल में ही बिताने की संभावना है।
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आसाराम बापू की सजा का फैसला स्थानीय समुदाय में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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