निजी क्षेत्र का FY26 में नए निवेश में 70% हिस्सा, कुल योजनाएं ₹41 लाख करोड़ के पार
निजी क्षेत्र ने संभाली कमान: FY26 में नए निवेश में 70% हिस्सेदारी, कुल योजनाएं ₹41 लाख करोड़ के पार
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वित्त वर्ष 2025-26 में नए पूंजी निवेश का 70% हिस्सा निजी क्षेत्र के हाथों में रहा, जो पिछले वर्षों के मुकाबले सबसे अधिक है। नए निवेश की कुल राशि ₹41 लाख करोड़ तक पहुंच गई, जबकि सरकारी पूंजीगत व्यय में केवल 1% की वृद्धि हुई। विनिर्माण क्षेत्र में सबसे अधिक 47% की वृद्धि दर्ज की गई है।
- 01नए पूंजी निवेश में निजी क्षेत्र का हिस्सा 70% से अधिक रहा।
- 02नए निवेश की कुल राशि ₹41 लाख करोड़ तक पहुंची।
- 03विनिर्माण क्षेत्र में 47% की वृद्धि हुई।
- 04सरकारी पूंजीगत व्यय में केवल 1% की वृद्धि हुई।
- 05निवेशकों के लिए महाराष्ट्र सबसे पसंदीदा राज्य बना रहा।
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वित्त वर्ष 2025-26 में नए पूंजी निवेश में निजी क्षेत्र का हिस्सा 70.34% रहा, जो पिछले वर्ष के 61.23% से अधिक है। नए निवेश की कुल राशि ₹41 लाख करोड़ तक पहुंच गई, जिसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी 51.5% बढ़ी। विनिर्माण क्षेत्र ने 47% की वृद्धि दर्ज की, जबकि सरकारी पूंजीगत व्यय में केवल 1% की वृद्धि हुई। जनवरी-मार्च तिमाही में भारत की नई निवेश योजनाएं 8.6 लाख करोड़ रुपये रह गईं, जो पिछले तीन तिमाहियों में 16 लाख करोड़ रुपये से अधिक थीं। ओडिशा के ढेंकेनाल में वेदांत का 1.28 लाख करोड़ रुपये का एल्युमीनियम स्मेल्टर वित्त वर्ष 26 में घोषित सबसे बड़ी परियोजना रही। महाराष्ट्र ने 11.05 लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ शीर्ष स्थान बनाए रखा। हालांकि, वैश्विक चुनौतियों के कारण वित्त वर्ष 27 में सार्वजनिक क्षेत्र के पूंजीगत व्यय की आवश्यकता बढ़ सकती है।
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नए निजी निवेशों की वृद्धि से रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं और आर्थिक विकास को गति मिल सकती है।
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