पलामू में मजदूरों का पलायन: निर्माण ठप, रोजी-रोटी की तलाश
पलामू से मजदूरों का क्यों हो रहा पलायान, मजदूरों ने कहा- सुबह होती है उम्मीद... दोपहरी होते-होते दम तोड़ देती
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पलामू जिले, झारखंड, भारत में मजदूरों का पलायन बढ़ रहा है क्योंकि बालू घाटों की नीलामी न होने से निर्माण कार्य ठप हो गया है। मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है, जिससे वे दूसरे राज्यों की ओर जाने को मजबूर हैं।
- 01पलामू में बालू की कमी से निर्माण कार्य ठप हो गया है।
- 02मजदूर रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं।
- 03बालू घाटों की नीलामी न होने से हजारों परिवार प्रभावित हो रहे हैं।
- 04मजदूरों की उम्मीदें सुबह जागती हैं लेकिन दोपहर तक टूट जाती हैं।
- 05अगर समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो पलायन की स्थिति और बिगड़ सकती है।
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पलामू जिले, झारखंड, भारत में मजदूरों का पलायन एक गंभीर समस्या बन गई है। बालू घाटों की नीलामी न होने के कारण निर्माण कार्य ठप हो गया है, जिससे मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है। मजदूरों का कहना है कि पहले उन्हें रोज काम मिलता था, लेकिन अब वे रोजी-रोटी की मजबूरी में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। मेदिनीनगर में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले मजदूरों को भी काम नहीं मिल रहा है। बालू की भारी किल्लत ने न केवल निर्माण परियोजनाओं को प्रभावित किया है, बल्कि यह एक सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी बन गई है। मजदूरों की उम्मीदें सुबह जागती हैं, लेकिन दोपहर होते-होते दम तोड़ देती हैं। अगर बालू घाटों की नीलामी जल्द नहीं की गई, तो पलायन का यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।
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अगर बालू घाटों की नीलामी नहीं की गई, तो मजदूरों की स्थिति और खराब हो सकती है, जिससे उनकी रोजी-रोटी का संकट बढ़ेगा।
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