जोशीमठ में भूधंसाव की गंभीरता: 80 मीटर गहराई तक नहीं मिली ठोस चट्टान
उत्तराखंड के जोशीमठ में 80 मीटर गहराई तक भी नहीं ठोस चट्टान, नदी की ओर खिसक रहा शहर
Jagran
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जोशीमठ, चमोली जिले में भूधंसाव की समस्या गंभीर बनी हुई है, जहां 80 मीटर गहराई तक ठोस चट्टान नहीं मिली है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्यों ने इस स्थिति पर चिंता जताई है और विभिन्न स्थानों पर राक बोल्टिंग के कार्य प्रस्तावित किए हैं।
- 01जोशीमठ में 80 मीटर गहराई तक ठोस चट्टान नहीं मिली है।
- 02भूधंसाव के कारण 700 से अधिक घरों में दरारें आई हैं।
- 03राक बोल्टिंग के कार्य खतरे में पड़ सकते हैं।
- 04जोशीमठ क्षेत्र मलबे के ढेर पर बसा है।
- 05जांच प्रक्रिया अभी जारी है और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कार्य करने की आवश्यकता है।
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जोशीमठ, चमोली जिले में भूधंसाव की गंभीर स्थिति का सामना कर रहा है, जहां दिसंबर 2022 से प्रारंभ हुई समस्या अब भी जारी है। जनवरी 2023 में यह स्थिति अपने चरम पर थी, जिससे 700 से अधिक घरों में दरारें आ गईं। हाल में की गई जांच में यह पाया गया कि जोशीमठ क्षेत्र में 80 मीटर गहराई तक ठोस चट्टान (हार्ड राक) नहीं है। यह जानकारी वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान द्वारा आयोजित कार्यशाला में सामने आई, जहां बताया गया कि बड़ा भूभाग नदी की दिशा में खिसक रहा है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सदस्य डा दिनेश के असवाल ने इस स्थिति पर चिंता जताई और राक बोल्टिंग के कार्यों के लिए जमीन की कोर सैंपलिंग की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि जांच प्रक्रिया अभी जारी है और सभी कार्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण से किए जाने चाहिए। जोशीमठ का क्षेत्र मलबे के ढेर पर बसा हुआ है, जो ग्लेशियरों द्वारा छोड़े गए मलबे पर विकसित हुआ है।
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जोशीमठ के निवासियों को भूधंसाव के कारण अपने घरों में दरारों और संभावित नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
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