दिल्ली हाई कोर्ट ने कोमा में पड़े सैनिक के स्पर्म सुरक्षित रखने की अनुमति दी
दिल्ली हाई कोर्ट का अहम फैसला, 10 महीने से कोमा में पड़े सैनिक के स्पर्म सुरक्षित रखने के लिए दी मंजूरी
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दिल्ली हाई कोर्ट ने एक भारतीय सेना के जवान के स्पर्म निकालने और सुरक्षित रखने की अनुमति दी है, जो 10 महीने से कोमा में हैं। अदालत ने कहा कि जवान की पत्नी की सहमति वैध मानी जाएगी, जिससे वह आईवीएफ उपचार जारी रख सकेंगी।
- 01दिल्ली हाई कोर्ट ने कोमा में पड़े सैनिक के स्पर्म निकालने की अनुमति दी।
- 02सैनिक की पत्नी ने आईवीएफ उपचार के लिए अदालत में याचिका दायर की थी।
- 03कोर्ट ने कहा कि पति की लिखित सहमति की अनुपस्थिति में भी पत्नी का अधिकार सुरक्षित है।
- 04सैनिक को जुलाई 2025 में गंभीर चोट लगी थी, जिसके बाद से वह कोमा में हैं।
- 05डॉक्टरों ने कहा कि जीवित स्पर्म मिलने की संभावना कम है।
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दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में भारतीय सेना के एक जवान के स्पर्म निकालने और उसे सुरक्षित रखने की अनुमति दी है, जो पिछले 10 महीनों से कोमा में हैं। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने कहा कि जवान की पत्नी की याचिका पर यह निर्णय लिया गया, जिसमें उसने आईवीएफ उपचार के लिए अपने पति के स्पर्म को सुरक्षित रखने की मांग की थी। अदालत ने यह भी माना कि जवान और उनकी पत्नी ने पहले ही आईवीएफ उपचार के लिए सहमति दी थी, जो कि असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट-2021 के तहत वैध मानी जाएगी। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अन्य कानूनी आवश्यकताएँ और पति की चिकित्सा स्थिति पर निर्भर करेगा। डॉक्टरों ने कहा कि स्पर्म निकालना तकनीकी रूप से संभव है, लेकिन जीवित स्पर्म मिलने की संभावना कम है।
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इस निर्णय से सैनिकों और उनके परिवारों को प्रजनन संबंधी मामलों में कानूनी सहारा मिलेगा।
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