दिल्ली HC ने NDPS मामले में जमानत दी, पुलिस की लापरवाही पर उठाए सवाल
NDPS मामले में जमानत देते हुए दिल्ली HC ने लगाई पुलिस को फटकार, कहा- सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, मुकदमे की भी जिम्मेदारी

Image: Jagran
दिल्ली हाई कोर्ट ने NDPS मामले में जमानत देते हुए दिल्ली पुलिस की लापरवाही पर सवाल उठाए। न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने कहा कि पुलिस की जिम्मेदारी केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि मुकदमे की भी देखभाल करनी चाहिए। आरोपित रिफत अली को 10,000 रुपये के निजी मुचलके पर रिहा किया गया।
- 01दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि पुलिस को केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि मुकदमे की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।
- 02अदालत ने पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि आरोपित की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लिया जाए।
- 03आरोपित रिफत अली को 10,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी गई।
- 04पुलिस अधिकारियों को यह जानकारी नहीं थी कि पिछले जांच अधिकारी के सेवानिवृत्त होने के बाद जांच किसे सौंपी गई।
- 05अदालत ने संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत त्वरित ट्रायल के अधिकार को महत्वपूर्ण बताया।
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दिल्ली हाई कोर्ट ने NDPS (नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस) मामले में जमानत देते हुए दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने कहा कि पुलिस की भूमिका केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें मुकदमे की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। अदालत ने यह भी पाया कि पुलिस अधिकारियों को यह जानकारी नहीं थी कि पिछले जांच अधिकारी के सेवानिवृत्त होने के बाद मामले की जांच किसे सौंपी गई। इस संदर्भ में, पीठ ने पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वे आरोपित की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लें। आरोपित रिफत अली को 10,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी गई है। अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष को ट्रायल की स्थिति के बारे में सही जानकारी नहीं दी गई थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उचित समय सीमा के भीतर मामले की सुनवाई पूरी करने की संभावना नहीं है। इस प्रकार, अदालत ने संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत त्वरित ट्रायल के अधिकार को महत्वपूर्ण मानते हुए जमानत याचिका स्वीकार की।
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इस निर्णय से उन आरोपितों को राहत मिलेगी जो लंबी हिरासत में हैं और जिनके मामलों में पुलिस की लापरवाही है।
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