कोक स्टूडियो का 'कचौड़ी गली': बनारस की तवायफ की प्रेम कहानी
बनारस की तवायफ के दिल टूटने की दास्तां है Kachaudi Gali, जानिए Coke Studio के गाने की 200 साल पुरानी कहानी
Image: Nbt Navbharattimes
'कचौड़ी गली', कोक स्टूडियो का नया गाना, भोजपुरी लोक संगीत पर आधारित है और इसे रेखा भारद्वाज ने गाया है। यह गाना बनारस की तवायफ गौहर जान के प्रेम की दास्तान को दर्शाता है, जो 19वीं शताब्दी में मिर्जापुर के एक युवक के प्रति अपने प्यार में तड़पती हैं।
- 01'कचौड़ी गली' गाना बनारस की कचौड़ी गली से जुड़ा है, जो काशी विश्वनाथ मंदिर के पास स्थित है।
- 02गाने की कहानी एक तवायफ गौहर जान की है, जो अपने प्रेमी के लिए तड़पती हैं, जो मिर्जापुर में काम करने गया है।
- 03यह गाना 'गिरमिटिया गीत' के रूप में भी जाना जाता है, जो बंधुआ मजदूरों के पलायन की कहानी को दर्शाता है।
- 04गाने में 19वीं शताब्दी के एंग्लो-बर्मी युद्ध का भी संदर्भ है, जिसमें हजारों भारतीयों को रंगून भेजा गया।
- 05गाने का नया संस्करण भोजपुरी लोकगीतों और इतिहास को पुनर्जीवित करता है, जो संस्कृति और राजनीति पर चर्चा का स्थल रहा है।
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'कचौड़ी गली', कोक स्टूडियो का नया गाना, भोजपुरी लोक संगीत का एक सुंदर उदाहरण है, जिसे रेखा भारद्वाज और उत्पल उदित ने गाया है। यह गाना बनारस की कचौड़ी गली से जुड़ा है, जो काशी विश्वनाथ मंदिर के पास स्थित है। गाने की कहानी 19वीं शताब्दी की तवायफ गौहर जान की है, जो अपने प्रेमी के लिए तड़पती हैं, जो मिर्जापुर में काम करने गया है। गाने में दर्द और प्रेम का मिश्रण है, जो एक समय की कहानी को जीवित करता है। इसे 'गिरमिटिया गीत' के रूप में भी जाना जाता है, जो बंधुआ मजदूरों के पलायन को दर्शाता है। इस गाने में एंग्लो-बर्मी युद्ध का संदर्भ भी है, जिसमें हजारों भारतीयों को रंगून भेजा गया। नया संस्करण भोजपुरी लोकगीतों और इतिहास को पुनर्जीवित करता है, जो संस्कृति और राजनीति पर चर्चा का स्थल रहा है।
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गाने ने बनारस की सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्जीवित किया है और स्थानीय लोगों के लिए एक नई पहचान बनाई है।
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