भारत में परीक्षा के तनाव से छात्रों की आत्महत्या की बढ़ती दर
JEE-NEET की रेस में पीछे छूट रहा बचपन, रिजल्ट के नाम पर क्यों घबराने लगते हैं बच्चे?
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भारत में परीक्षा परिणामों के दबाव के कारण छात्रों में आत्महत्या की दर में 65% की वृद्धि हुई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में लगभग 14,000 छात्रों ने आत्महत्या की, जो शिक्षा प्रणाली की खामियों को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मेंटॉरशिप सिस्टम को लागू करना आवश्यक है ताकि छात्रों को सही मार्गदर्शन मिल सके।
- 012023 में लगभग 14,000 छात्रों ने आत्महत्या की।
- 02पिछले 10 वर्षों में छात्रों की आत्महत्या में 65% की वृद्धि हुई है।
- 0370% से अधिक छात्र लगातार एकेडमिक तनाव महसूस करते हैं।
- 04Mentorship सिस्टम को स्कूलों में लागू करना आवश्यक है।
- 05शिक्षा का असली मकसद जीवन संवारना है, न कि तनाव उत्पन्न करना।
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भारत में परीक्षा परिणामों के दबाव के कारण छात्रों में आत्महत्या की दर में 65% की वृद्धि हुई है। आईसी3 इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में लगभग 14,000 छात्रों ने आत्महत्या की, जिससे यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा प्रणाली बच्चों पर अत्यधिक दबाव डाल रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 70% से अधिक छात्र एकेडमिक तनाव का सामना कर रहे हैं, और 60% माता-पिता या समाज के दबाव में जी रहे हैं। मेंटॉर निखार अरोड़ा का मानना है कि छात्रों को सही मार्गदर्शन की आवश्यकता है ताकि वे अपनी रुचियों के अनुसार निर्णय ले सकें। उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूलों में मेंटॉरशिप को अनिवार्य किया जाना चाहिए और शिक्षकों को भी इस दिशा में प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। शिक्षा का असली मकसद जीवन को संवारना है, और इसे खत्म करने का नहीं होना चाहिए।
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यह समस्या छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है और शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता को दर्शाती है।
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