दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश: CLAT टॉपर के नाम और तस्वीरों का उपयोग रोका गया
लॉ-प्रेप कोचिंग को हटाना होगा CLAT टॉपर का वीडियो-फोटो: दिल्ली HC
Aaj Tak
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने लॉ प्रेप ट्यूटोरियल को CLAT 2026 की टॉपर गीताली गुप्ता के नाम और तस्वीरों के उपयोग से रोकने का आदेश दिया है। अदालत ने इसे छात्रा की पहचान का अनुचित उपयोग करार दिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को मानहानिकारक सामग्री हटाने का निर्देश दिया।
- 01दिल्ली हाई कोर्ट ने गीताली गुप्ता के नाम और तस्वीरों का अनुचित उपयोग रोकने का आदेश दिया।
- 02कोचिंग संस्थानों के बीच 'क्रेडिट' की जंग और डिजिटल मानहानि का मामला।
- 03लीगल एज ने छात्रा को अपनी 'एक्सक्लूसिव' स्टूडेंट बताने का प्रयास किया।
- 04अदालत ने गूगल और मेटा को मानहानिकारक सामग्री हटाने का आदेश दिया।
- 05मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई और 24 अगस्त 2026 को होगी।
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने लॉ प्रेप ट्यूटोरियल (LPT) को CLAT 2026 की ऑल इंडिया टॉपर (AIR-1) गीताली गुप्ता के नाम, पहचान और तस्वीरों का उपयोग करने से रोक दिया है। जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने कहा कि छात्रा की पहचान का व्यावसायिक लाभ के लिए अनुचित उपयोग नहीं किया जा सकता। यह मामला टॉप रैंकर्स एडटेक (LegalEdge) और छात्रा द्वारा दायर किया गया था। छात्रा ने लीगल एज के 'चैंपियंस बैच' में कोचिंग ली थी, जबकि LPT के साथ उनका जुड़ाव केवल एक डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम तक सीमित था। अदालत ने कहा कि छात्रा को इस विवाद में एक 'मोहरा' बनाया गया है। इसके अलावा, गूगल और मेटा को 72 घंटे के भीतर मानहानिकारक सामग्री हटाने का आदेश दिया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई और 24 अगस्त 2026 को होगी।
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इस आदेश से छात्रा की पहचान और प्रतिष्ठा की सुरक्षा होगी, जिससे अन्य छात्रों को भी अपनी पहचान का सही उपयोग सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
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