भारतीय नौसेना के लिए टोनबो इमेजिंग द्वारा विकसित नई HPM तकनीक
न गोला बरसेगा, न चलेगी मिसाइल... एक 'बीम' और दुश्मन का ड्रोन स्वाहा! जानिए क्या है नौसेना की नई HPM तकनीक

Image: Ndtv
बेंगलुरु स्थित टोनबो इमेजिंग को भारतीय नौसेना के लिए हाई पावर माइक्रोवेव (HPM) आधारित एंटी-ड्रोन सिस्टम विकसित करने का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह प्रणाली दुश्मन के ड्रोन और संचार सिस्टम को बिना विस्फोट के निष्क्रिय करने में सक्षम है। यह तकनीक ADITI 3.0 इनोवेशन स्कीम के तहत विकसित की जा रही है।
- 01HPM तकनीक को Directed Energy Weapon के तहत रखा गया है, जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा का उपयोग करती है।
- 02टोनबो इमेजिंग के CEO अरविंद लक्ष्मीकुमार ने बताया कि कंपनी ने वैक्यूम ट्यूब आधारित हाई-पावर RF तकनीक विकसित की है।
- 03ADITI योजना का उद्देश्य नई रक्षा तकनीकों को तेजी से सशस्त्र बलों तक पहुंचाना है।
- 04HPM तकनीक का उपयोग करने वाले देशों में अमेरिका, चीन, रूस और ब्रिटेन शामिल हैं।
- 05यह तकनीक ड्रोन स्वॉर्म हमलों को रोकने के लिए एक किफायती विकल्प के रूप में देखी जा रही है।
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बेंगलुरु स्थित रक्षा तकनीक कंपनी टोनबो इमेजिंग को भारतीय नौसेना से एक महत्वपूर्ण कॉन्ट्रैक्ट मिला है, जिसके तहत कंपनी हाई पावर माइक्रोवेव (HPM) आधारित एंटी-ड्रोन सिस्टम विकसित करेगी। यह परियोजना ADITI 3.0 इनोवेशन स्कीम के अंतर्गत आती है, जिसे रक्षा मंत्रालय के iDEX और Defence Innovation Organisation (DIO) का समर्थन प्राप्त है। HPM प्रणाली को Directed Energy Weapon की श्रेणी में रखा गया है, जिसमें पारंपरिक हथियारों के बजाय इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा का उपयोग किया जाता है। यह तकनीक दुश्मन के ड्रोन और संचार सिस्टम के इलेक्ट्रॉनिक्स को बाधित कर सकती है, जिससे बिना किसी बड़े विस्फोट के ड्रोन को निष्क्रिय किया जा सकता है। वर्तमान में अमेरिका, चीन, रूस और ब्रिटेन जैसे देशों के पास ही उन्नत HPM तकनीक उपलब्ध है। टोनबो इमेजिंग के CEO अरविंद लक्ष्मीकुमार ने बताया कि कंपनी ने वैक्यूम ट्यूब आधारित हाई-पावर RF तकनीक विकसित की है, जो इस तरह के हथियारों का अहम हिस्सा होती है। ADITI योजना का उद्देश्य नई रक्षा तकनीकों को तेजी से सशस्त्र बलों तक पहुंचाना है, जिससे आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा मिल सके।
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यह तकनीक भारतीय नौसेना को ड्रोन हमलों से सुरक्षा प्रदान करेगी, जिससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
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