भारतीयों की थाली में अनाज की प्रधानता, दाल-सब्जी की कमी: सरकारी अध्ययन
Indian Food Habit: भारतीयों की थाली में चावल-रोटी की भरमार, दाल-सब्जी हुईं गायब
Image: Nbt Navbharattimes
एक सरकारी अध्ययन के अनुसार, भारतीयों की थाली में अनाज, विशेषकर चावल और गेहूं, की प्रधानता है, जबकि दाल, सब्जियां, फल, दूध और मछली की खपत कम हो रही है। यह स्थिति गैर-संक्रामक बीमारियों के बढ़ने का कारण बन सकती है।
- 01भारतीयों को महीने में 7.5 किलो अनाज का सेवन करना चाहिए, लेकिन यह आंकड़ा ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है।
- 02पश्चिम बंगाल, ओडिशा, त्रिपुरा और मणिपुर में सबसे ज्यादा अनाज खाया जाता है।
- 03शहरी क्षेत्रों में भी अनाज की खपत अधिक है, विशेषकर त्रिपुरा और मणिपुर में।
- 04रेस्तरां में खाना और पैकेट बंद फूड अब लोगों के जीवनशैली का हिस्सा बन गया है।
- 05विशेषज्ञों का मानना है कि यह आहार परिवर्तन गैर-संक्रामक बीमारियों को बढ़ा सकता है।
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नई दिल्ली में किए गए एक सरकारी अध्ययन में यह पाया गया है कि भारतीयों की थाली में अनाज, विशेषकर चावल और गेहूं, का प्रमुख स्थान है। अध्ययन के अनुसार, भारतीय परिवारों में दाल, सब्जियों, फलों, दूध और मछली का सेवन कम हो रहा है। भारतीयों को प्रति माह 7.5 किलो अनाज का सेवन करना चाहिए, लेकिन यह आंकड़ा ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है, जैसे पश्चिम बंगाल, ओडिशा, त्रिपुरा और मणिपुर, जहां अनाज की खपत क्रमशः 11.2 किलो तक पहुंच जाती है। शहरी क्षेत्रों में भी त्रिपुरा और मणिपुर में अनाज की खपत अधिक है। इस अध्ययन में यह भी देखा गया है कि रेस्तरां में खाना और पैकेट बंद फूड अब लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बन गया है, जिससे गैर-संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
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भारतीयों की बदलती खाने की आदतें स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं, जिससे गैर-संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
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