एफएमसीजी कंपनियों की कीमतें बढ़ाने की रणनीति: मिडिल ईस्ट संकट के बीच महंगाई का सामना
FMCG Price Hike: दाम बढ़ाओ-माल घटाओ, मिडिल ईस्ट संकट के बीच इसलिए बनी यह स्ट्रैटेजी, पूरी डिटेल
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भारत में एफएमसीजी कंपनियां, जैसे डाबर इंडिया और ब्रिटानिया, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव के कारण अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने की योजना बना रही हैं। हाल ही में, कंपनियों ने 3 से 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, जिससे ग्राहकों पर बोझ बढ़ सकता है।
- 01एफएमसीजी कंपनियां कच्चे तेल और पैकेजिंग लागत में वृद्धि के कारण कीमतें बढ़ाने की योजना बना रही हैं।
- 02डाबर इंडिया ने पहले ही 4 प्रतिशत की कीमत वृद्धि की है।
- 03ब्रिटानिया और एचयूएल जैसी कंपनियां भी कीमतों में बढ़ोतरी का संकेत दे रही हैं।
- 04महंगाई का दबाव सभी सेक्टरों में महसूस किया जा रहा है।
- 05ग्राहकों को धीरे-धीरे बढ़ती कीमतों और कम पैकेट आकार का सामना करना पड़ सकता है।
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भारत में एफएमसीजी (फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स) कंपनियां जैसे डाबर इंडिया, ब्रिटानिया और एचयूएल, कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, पैकेजिंग की लागत और भू-राजनीतिक तनाव के कारण अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाने की योजना बना रही हैं। हाल ही में, कंपनियों ने कीमतों में 3 से 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। डाबर इंडिया के ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा ने बताया कि कंपनी ने पहले ही कीमतों में 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है और उन्हें इस वित्त वर्ष में 10 प्रतिशत की महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। ब्रिटानिया के सीईओ रक्षित हरगवे ने भी संकेत दिया कि कंपनी कीमतों में वृद्धि और पैकेट का आकार छोटा करने पर विचार कर रही है। एचयूएल के सीएफओ निरंजन गुप्ता ने कहा कि उन्होंने पहले ही 2 से 5 प्रतिशत की कीमतें बढ़ा दी हैं। इन सभी कंपनियों का लक्ष्य अपने मुनाफे को बनाए रखना है, लेकिन ग्राहकों को धीरे-धीरे बढ़ती कीमतों और कम पैकेट आकार का सामना करना पड़ सकता है।
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उपभोक्ताओं को रोजमर्रा की वस्तुओं के लिए अधिक कीमतें चुकानी पड़ सकती हैं, जिससे उनके बजट पर दबाव बढ़ सकता है।
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