हर्ष गोयनका की पोस्ट से भारतीय सिविक सेंस पर नई बहस
भारतीयों की सिविक सेंस पर फिर छिड़ी बहस, हर्ष गोयनका की पोस्ट ने उठाए बड़े सवाल

Image: News 18 Hindi
उद्योगपति हर्ष गोयनका की सोशल मीडिया पोस्ट ने भारतीयों की सिविक सेंस और सार्वजनिक व्यवहार पर बहस छेड़ दी है। उन्होंने स्विट्जरलैंड के एक होटल में भारतीय मेहमानों के लिए बनाए गए विशेष नियमों का जिक्र किया, जिससे यह सवाल उठता है कि भारत को वैश्विक पहचान के लिए नागरिक व्यवहार में सुधार करने की आवश्यकता है।
- 01हर्ष गोयनका ने स्विट्जरलैंड के होटल में भारतीय मेहमानों के लिए बनाए गए विशेष नियमों की आलोचना की।
- 02उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासनहीनता के उदाहरणों, जैसे गरबा और ऊंची आवाज में बातचीत, का उल्लेख किया।
- 03गोयनका का मानना है कि भारत को वैश्विक स्तर पर सम्मान पाने के लिए नागरिक व्यवहार में सुधार करना होगा।
- 04जापान की नागरिक संस्कृति को उदाहरण के रूप में पेश करते हुए गोयनका ने अनुशासन और शिष्टता की आवश्यकता पर जोर दिया।
- 05विशेषज्ञों का मानना है कि किसी देश की पहचान उसके नागरिकों के व्यवहार से भी बनती है।
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नई दिल्ली में उद्योगपति हर्ष गोयनका की सोशल मीडिया पोस्ट ने भारतीयों की सिविक सेंस और सार्वजनिक व्यवहार को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। गोयनका ने एक स्विस होटल में भारतीय मेहमानों के लिए बनाए गए विशेष नियमों का जिक्र किया, जिसमें नाश्ते के बुफे से भोजन बाहर न ले जाने और शोर न करने की सलाह शामिल थी। उन्होंने कहा कि यह नियम भारतीय नागरिकों के प्रति एक नकारात्मक धारणा को दर्शाते हैं। गोयनका ने सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासनहीनता के कई उदाहरण दिए, जैसे रेस्तरां में गरबा करना और हवाई अड्डों पर तेज आवाज में बातचीत करना। उन्होंने जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की नागरिक संस्कृति ने देश को वैश्विक पहचान दिलाई है। गोयनका का मानना है कि भारत को भी अपने नागरिकों के व्यवहार में सुधार करना होगा ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक सम्मान प्राप्त किया जा सके।
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भारतीय नागरिकों के सार्वजनिक व्यवहार में सुधार से देश की अंतरराष्ट्रीय छवि बेहतर हो सकती है।
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